भोपाल, 01 अप्रैल (वार्ता) लोकायुक्त छापों के बाद चर्चा में आए मध्यप्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके दो साथियों को आज लोकायुक्त की विशेष अदालत ने जमानत प्रदान कर दी। हालाकि अन्य जांच एजेंसियों से संबंधित मुकदमों में उन्हें अभी जमानत नहीं मिली है, जिसके चलते आरोपी जेल में ही रहेंगे।
लोकायुक्त की विशेष अदालत ने तकनीकी आधार पर सौरभ शर्मा और उसके दो साथियों चेतन सिंह तथा शरद जायसवाल को जमानत प्रदान कर दी। लोकायुक्त पुलिस ने निर्धारित समय सीमा 60 दिन के अंदर आरोपपत्र पेश नहीं किया, जिसके चलते उन्हें जमानत प्रदान कर दी गयी है। इन आरोपियों के खिलाफ आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मामले दर्ज किए हैं और इनसे संबंधित मामलों में जमानत नहीं मिलने के कारण फिलहाल वे जेल में ही रहेंगे।
दिसंबर 2024 के तीसरे सप्ताह में लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापे की कार्रवाई की थी। उस समय करोड़ों रुपयों की संपत्ति संबंधी दस्तावेज, नगदी और गहने आदि मिले थे। इसी दौरान आयकर विभाग ने एक कार से 52 किलो सोना और लगभग दस करोड़ रुपए नगद जप्त किए थे। इन कार्रवाइयों के बाद ईडी ने भी अपनी कार्रवाई प्रारंभ की थी। सौरभ और उसके साथियों को लगभग दो माह पहले गिरफ्तार किया गया था, तब से वे तीनों यहां जेल में हैं। इस दौरान लोकायुक्त पुलिस, आयकर विभाग और ईडी ने उनसे पूछताछ भी की।
इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि लोकायुक्त द्वारा आरोपपत्र दाखिल नहीं करने के चलते सौरभ शर्मा को जमानत का लाभ मिलना सामान्य घटना नहीं है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि इस भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त पुलिस की कार्यप्रणाली पहले भी सवालों के घेरे में रही है।
