लेकिन कईं जगहों पर भवन तय समय सीमा में पूर्ण नहीं होने पर इस योजना का लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहा है.मामला पड़ाना ग्राम पंचायत का है. यहां तय समय सीमा से 4 माह बीत जाने के बाद भी भवन का निर्माण पूर्ण नहीं हो सका है. ऐसे में इस शैक्षणिक सत्र में भी विद्यार्थियों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पाएगा.
पुराने साधनों में निकलेगा नया सत्र
ग्राम पंचायत पड़ाना में वर्ष 2023 में 1 मई को भवन का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया था. इसके पूर्ण होने की समय सीमा 1 नवंबर 2024 थी. लेकिन तय समय सीमा बीतने के 4 माह बाद भी निर्माण पूर्ण नहीं हो सका है. अब फिर से नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू होगा. ऐसे में अब अगले सत्र तक विद्यार्थियों को इस भवन और योजना के तहत स्कूल में सुविधाओं का लाभ मिल पाएगा. निर्माण कार्य काफी धीमे चल रहा है. निर्माण एजेंसी समय सीमा में काम पूर्ण नहीं कर पा रही है.
गणवेश का मामला अभी भी नहीं निपटा
पड़ाना में विद्यार्थियों को विभाग गणवेश और उसकी राशि भी समय पर नहीं दे पा रहा है. बीते दिनों समाचार पत्रों के माध्यम से विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का ध्यानाकर्षण किया गया था. लेकिन इस शैक्षणिक सत्र के समापन तक भी विद्यार्थियों के गणवेश संबंधी कार्य और मांग पूर्ण नहीं हो पाए है. ऐसे में इन विद्यार्थियों के लिए बडे से विशाल भवन में सर्वसुविधायुक्त स्कूल की कल्पना करना बड़ा सपना प्रतीत होत है.
ये सुविधाएं मिलेंगी
इस योजना के तहत 45 करोड़ रुपए की लागत से स्कूल भवन का निर्माण होना है. स्कूल भवन में ऑडिटोरियम, प्रयोगशाला, स्पोट्र्स काम्प्लेक्स, लाईब्रेरी जैसी वे आधुनिक सुविधाएं बच्चों को मिलेगी जो कमोबेश प्रायवेट स्कूलों में ही नजर आती है. प्रत्येक सीएम राइज स्कूल भवन के निर्माण में सरकार 45 करोड़ रूपये खर्च कर रही है. यह मोटी रकम ब्यावरा में भी खर्च हो जायेगी. विषय यह नहीं है कि इस राशि से होने वाले निर्माण की गुणवत्ता क्या होगी ? विषय यह है कि यह भवन उसी प्रकार अपनी मौत मर जायेगा जैसे आज नगर के कन्या उमावि की स्थिति है. सरकार ने सीएम राइज स्कूल परिकल्पना में यह भी शामिल किया है कि इस स्कू ल के आसपास के पांच किमी के शासकीय स्कूल बंद कर दिये जायेंगे. इन स्कूलों के बच्चों को बसों से इसमें लाया जायेगा. सरकार की मंशानुरूप अगर संचालन हुआ तो इसमें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी