
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने टीकमगढ़ के डीएफओ के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत पीडि़त को प्रकरण में अधिवक्ता नियुक्त करने से मना कर दिया गया था।
टीकमगढ़ निवासी भगवान सिंह परमार की ओर से अधिवक्ता शशांक उपाध्याय ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि वन विभाग के अधिकारियों ने उसके वाहन को जब्त किया था। याचिकाकर्ता ने विभाग से दस्तावेज मांगे ताकि वह जब्ती की कार्रवाई को चुनौती दे सके। उन्होंने दलील दी कि इंडियन फॉरेस्ट एक्ट की धारा 52 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो पक्षकार को अधिवक्ता नियुक्त करने से रोके। इसके बावजूद टीकमगढ़ डीएफओ ने उसका आवेदन निरस्त कर दिया। जिसके बाद न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
