ननि परिषद की बैठक से महापौर समेत एमआईसी सदस्य रहे नदारत

सिंगरौली : नगर निगम में बजट सत्र को लेकर परिषद अध्यक्ष देवेश पांडे की अध्यक्षता में बैठक थी। जिसमें भाजपा एवं कांग्रेस के पार्षदों ने एमआईसी सदस्यों एवं महापौर के बैठक से नदारत रहने पर जमकर नारेबाजी करते हुए हंगामा किया। अंतत: परिषद की बैठक को अध्यक्ष ने स्थगित कर दिया है. भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने आज परिषद की बैठक में एकजुट का परिचय देते हुए महापौर आयुक्त और एमआईसी सदस्यों को घेरने लगे। पार्षद भारतेंदु पाण्डेय ने कहा कि कमिश्रर जो एजेंट देंगे उसे पर विचार होना चाहिए। लेकिन महापौर अपने हिसाब से एजेंडा बनाती हैं । अधिकारियों को परेशान किया जाता है। ढाई साल का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। लेकिन एक भी एमआईसी के तहत शहर में विकास नही दिखाई दे रहा है।
बैठक में व्यवसाई प्लाजा पर चर्चा होनी चाहिए: देवेश
ननि अध्यक्ष देवेश पाण्डेय ने कहा कि परिषद की बैठक में मेयर और एमआईसी के सदस्य बैठक में नहीं पहुंचे। साथ ही आयुक्त भी बाहर हंै। सभी पार्षदों ने एक स्वर में विरोध जताते हुए कहा कि परिषद की बैठक दो माह में एक बार होनी चाहिए। पार्षदों का अधिकार हंै और उनकी ओर से की गई मांग पर 2 जनवरी को आयुक्त से पत्राचार किया था कि बैठक बुलाई जाए। लेकिन बैठक की तिथि तय करने में दो माह का वक्त लगा दिया गया। नियम के मुताबिक परिषद की बैठक को लेकर दस दिन पहले अधिसूचना जारी होना चाहिए था। किन्तु काफी देर से जानकारी मिली कि महापौर बाहर जाएंगी। हालांकि ऐसी स्थिति में एमआइसी के सदस्य प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में उपस्थित हो सकते थे। जबकि परिषद की बैठक समय पर संचालित होनी चाहिए। ताकि उसके एजेंडा में शामिल विकास कार्य समय पर पूरा हो सके। प्लाजा को सील किया गया है मगर अभी तक व्यापारियों को दुकानें उपलब्ध नहीं हो पाई। इसका समाधान भी तो परिषद में ही होगा।
इनका कहना
महापौर अपने क्रियाकलाप से परिषद को परेशान करने का काम कर रही हैं। नारेबाजी करने का कोई मकसद नहीं था। उद्देश्य यह था कि विकास के मुद्दे पर काम हो। नगर निगम सिंगरौली विकास की ओर अग्रसर हो। सभी ही यही मंशा है लेकिन आज की परिषद में महापौर व एमआईसी मेंबर के नहीं होने से परिषद में पार्षदों ने हंगामा करते हुए उसे स्थगित कर दिया है।
भारतेन्दु पांडेय, पार्षद
इनका कहना
पार्षद शेखर सिंह ने कहा कि आज की परिषद में न महापौर है और न एमआईसी। यदि महापौर नहीं हैं तो अपने प्रतिनिधि को रखना चाहिए था। ताकि परिषद चल सके। परिषद में विकास कार्यों को लेकर इतने एजेंडे हैं। मानना हैकि अपने प्रतिनिधि को बैठाना चाहिए। जिससे विकासकार्यों को गति मिल सके। शहर का विकास करना चाहती हैं या नहीं। यह तो महापौर ही बता सकती हैं

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