भारत के समग्र विकास की परिकल्पना को साकार करेगा केंद्रीय बजट : पंकज चौधरी

 

जबलपुर। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के 2047 के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करेगा। केंद्रीय बजट संपूर्ण भारत के समग्र विकास की परिकल्पना को साकार करने वाला है यह बात भारत सरकार के वित्त राज्य मंत्री मंत्री पंकज चौधरी ने वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट को लेकर आयोजित होटल नर्मदा जैक्शन में कही।

पत्रकारवार्ता में मप्र के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, राज्यसभा सांसद श्रीमती सुमित्रा वाल्मिकी, सांसद आशीष दुबे, प्रदेश कोषाध्यक्ष अखिलेश जैन, नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, ग्रामीण अध्यक्ष राजकुमार पटेल, महापौर जगतबहादूर सिंह अन्नू, विधायक अशोक रोहाणी, अभिलाष पांडे, तेलघानी बोर्ड अध्यक्ष रविकिरण साहू उपस्थित थे।

केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने कहा सुधारों को ईंधन और समावेशिता को मार्गदर्शक भावना के रूप में रखते हुए, वित्त वर्ष 2025-26 का केंद्रीय बजट विकसित भारत की गति निर्धारित करने का लक्ष्य रखता है। यह बजट स्वीकार करता है कि किसी देश की शक्ति उसकी भूमि में नहीं बल्कि उसके लोगों में होती है, और इस प्रकार, सभी वर्गों में समावेशी विकास के माध्यम से मोदी सरकार की सबका साथ, सबका विकास की प्रतिबद्धता को पुनर्जीवित करती है।

उन्होंने कहा केंद्रीय बजट चार प्रमुख इंजनों द्वारा संचालित है। ग्रामीण समृद्धि के लिए कृषि, उद्यमिता और रोजगार सृजन के लिए एम.एस.एम.ई, बुनियादी ढांचे और नवाचार के लिए निवेश, और वैश्विक प्रतिस्पर्धा व आर्थिक वृद्धि के लिए निर्यात। यह बजट छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है, अर्थात कराधान, ऊर्जा क्षेत्र, शहरी विकास, वित्तीय क्षेत्र, नियामक सुधार और खनन।

उन्होंने कहा इस बजट का लक्ष्य एक व्यापक छह-आयामी दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें विकास को गति देना, समावेशी विकास को सुरक्षित करना, भारत के मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति को बढ़ाना, निजी क्षेत्र के निवेश को प्रेरित करना और घरेलू भावना को सशक्त करना शामिल है।

बेहतर भविष्य के लिए मध्यम वर्ग को सशक्त बनाना

श्री चौधरी ने बताया ज्ञान के मुख्य स्तंभों के अतिरिक्त, मोदी सरकार ने मध्यम वर्ग को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को फिर दोहराया है, ताकि उसकी क्षमता को बढ़ाया जा सके और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को सुरक्षित किया जा सके। इस दिशा में, मोदी सरकार ने ‘विवाद से विश्वास’ की नीति को अपनाया है, जहां आयकर विभाग पहले करदाता पर विश्वास करता है और बाद में उनकी जांच करता है। वर्तमान बजट में इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज पर कर कटौती की सीमा को वर्तमान समय में ₹50 हजार से दोगुना कर ₹1 लाख कर दिया गया है।

इसी प्रकार, किराए पर टी.डी.एस की वार्षिक सीमा ₹2.40 लाख से बढ़ाकर ₹6 लाख कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, विदेशी प्रेषण पर कर संग्रह की सीमा ₹7 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, वर्तमान बजट के माध्यम से, मोदी सरकार ने मध्यम वर्ग पर कर बोझ को कम करने के मार्ग को जारी रखा है और :शून्यः कर श्रेणी को मौजूदा ₹7 लाख से बढ़ाकर ₹12 लाख कर दिया गया है, जिससे ₹1 लाख मासिक आय वाले व्यक्ति की कर देयता शून्य हो जाएगी। ₹12 लाख तक की सामान्य आय वाले करदाताओं को कर छूट दी जा रही है, जो स्लैब दर में कमी के कारण होने वाले लाभ के अतिरिक्त होगी, जिससे उनका कोई कर देय नहीं होगा। नए कर व्यवस्था के अंतर्गत, ₹12 लाख की आय वाले करदाता को ₹80 हजार का कर लाभ मिलेगा, जो मौजूदा दरों के अनुसार 100 प्रतिशत कर देयता के बराबर है। इसी प्रकार, ₹18 लाख की आय वाले व्यक्ति को ₹70 हजार का कर लाभ प्राप्त होगा।

कराधान सुधारों के अलावा, बजट ने शहरी निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए किफायती आवास प्रदान करने की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया है। इसके लिए ’स्वामी फंड 2’ लॉन्च किया गया है, जिसके अंतर्गत ₹15 हजार करोड़ की लागत से 1 लाख से अधिक घरों का निर्माण किया जाएगा, जिसमें 2025 में ही 40 हजार घरों के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। ये सुधार मध्यम वर्ग की क्षमताओं और दृढ़ संकल्प पर मोदी सरकार के विश्वास को दर्शाते हैं।

अन्नदाताओं का समग्र कल्याण

श्री चौधरी ने बताया पिछले दशक में, मोदी सरकार के भारतीय विकास एजेंडे के केंद्र में किसान रहे हैं। अन्नदाता शक्ति को और मजबूत करने के लिए, केंद्रीय बजट में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की घोषणा की गई है। इस योजना के पहले चरण में राज्यों के सहयोग से 100 कम उत्पादकता और कम बीमा कवरेज वाले कृषि जिलों को शामिल किया जाएगा। यह योजना कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने में मदद करेगी।

इसके साथ ही, भंडारण और सिंचाई सुविधाओं में सुधार किया जाएगा और किसानों को ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इससे 1.7 करोड़ से अधिक अन्नदाताओं को लाभ मिलेगा। कृषि क्षेत्र में रोजगार की कमी को दूर करने के लिए एक व्यापक बहु-क्षेत्रीय ग्रामीण समृद्धि और लचीलापन कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसमें कौशल विकास, निवेश और तकनीक के माध्यम से कृषि में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे।

उन्होंने कहा इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक ग्रामीण नागरिक के लिए प्रवासन एक आवश्यकता नहीं बल्कि विकल्प हो। खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए, दालों में आत्मनिर्भरता के लिए छह वर्षीय मिशन शुरू किया जाएगा। इसे नफेड और एन.सी.सी.एफ के साथ मिलकर संचालित किया जाएगा। अगले चार वर्षों में, किसानों से मिलने वाली तूर, उड़द और मसूर दालों की अधिकतम मात्रा की खरीद पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सब्जियों और फलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसमें कृषि उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता, प्रसंस्करण और किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने पर जोर दिया जाएगा। इससे भारत को एक स्वस्थ समाज की ओर आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

बिहार में मखाना बोर्ड स्थापित किया जाएगा। यह मखाना उत्पादकों को संगठित कर उन्हें किसान उत्पादक संगठन के रूप में विकसित करने में मदद करेगा। उन्हें प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे मखाने के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन में सुधार होगा। उच्च उपज देने वाले बीजों पर एक राष्ट्रीय मिशन शुरू किया जाएगा। यह उन्नत अनुसंधान, अधिक उपज देने वाले, कीट-रोधी और जलवायु – प्रतिरोधी बीजों के विकास और प्रचार-प्रसार पर केंद्रित होगा। साथ ही, जुलाई 2024 के बाद जारी 100 से अधिक बीज किस्मों की व्यावसायिक उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

समुद्री क्षेत्र की असीमित संभावनाओं को विकसित करने के लिए, मोदी सरकार भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र और हाई सीज़ में मत्स्य पालन को सतत रूप से दोहन करने के लिए एक सक्षम ढांचा लाएगी। इसमें अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप समूह पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

भारत के लाखों कपास किसानों की आय बढ़ाने के लिए, कपास उत्पादकता पर पांच वर्षीय राष्ट्रीय मिशन शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य कपास की उत्पादकता में वृद्धि और अतिरिक्त लंबा रेशा वाली कपास की किस्मों को बढ़ावा देना होगा। किसान क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत लिए जाने वाले ऋण की सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी जाएगी। यूरिया की आपूर्ति को और मजबूत करने के लिए, असम के नामरूप में 12.7 लाख मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाला एक नया संयंत्र स्थापित किया जाएगा। भविष्य में खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, दूसरा जीन बैंक स्थापित किया जाएगा, जिसमें 10 लाख जर्मप्लाज्म लाइन का संग्रह किया जाएगा।

विश्वस्तरीय शिक्षा के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाना

श्री चौधरी ने बताया मोदी सरकार इस बात को भली भाति समझती है कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश के युवाओं को उन्नत कौशल से लैस करना आवश्यक है। इस दिशा में केंद्रीय बजट में अगले पांच वर्षों में 50 हजार अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना की घोषणा की गई है। ये प्रयोगशालाएं सरकारी स्कूलों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने में मदद करेंगी। इसके अतिरिक्त, भारत नेट परियोजना के अंतर्गत सभी ग्रामीण सरकारी माध्यमिक विद्यालयों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी। इस बजट में :भारतीय भाषा पुस्तक योजनाः शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस योजना के तहत, भारतीय भाषाओं की पुस्तकें डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि छात्र अपनी शिक्षा में भाषा की कठिनाइयों को दूर कर सकें। जुलाई 2024 के बजट में घोषित पहल को आगे बढ़ाते हुए, सरकार वैश्विक विशेषज्ञता के साथ पांच राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करेगी। यह केंद्र युवाओं को मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्डः के तहत आवश्यक कौशल से सशक्त बनाएंगे।

आई.आई.टी. में 1.35 लाख छात्रों को सुविधा देने के लिए, मोदी सरकार 2014 के बाद स्थापित पांच आई.आई.टी. में अतिरिक्त बुनियादी ढांचे का निर्माण करेगी। इससे 6,500 और छात्रों को शिक्षा की सुविधा मिलेगी। साथ ही, आई.आई.टी. पटना में हॉस्टल सुविधाओं का विस्तार भी किया जाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देने के लिए, ₹500 करोड़ की लागत से ए.आई (AI) फॉर एजुकेशनः उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। पिछले वर्षों में मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या में 130 प्रतिशत वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया इसे और आगे बढ़ाते हुए, अगले पांच वर्षों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 75 हजार नई सीटें जोड़ी जाएंगी। जुलाई 2024 के बजट में घोषित निजी क्षेत्र द्वारा संचालित अनुसंधान, विकास और नवाचार पहल को लागू करने के लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। अगले पांच वर्षों में, प्रधानमंत्री अनुसंधान छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत, सरकार आईआईटी और आई.आई.एस.सी. में तकनीकी अनुसंधान के लिए 10,000 फेलोशिप प्रदान करेगी।

सामाजिक न्याय और सभी वर्गों के कल्याण के माध्यम से अमृत काल की अभिव्यक्ति

श्री चौधरी ने बताया वर्तमान बजट यह स्वीकार करता है कि मानव संसाधन क्षमता का विकास आर्थिक वृद्धि का तीसरा महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 कार्यक्रमों को सशक्त बनाया गया है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं, तथा किशोरियों का कल्याण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया इसके अतिरिक्त, मोदी सरकार ने इस बजट के माध्यम से देशभर में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कार्यरत 1 करोड़ से अधिक गिग वर्कर्स की जरूरतों को भी पहचाना है। इन श्रमिकों को सामाजिक पहचान देने के लिए उन्हें पहचान पत्र जारी किए जाएंगे और उन्हें ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत किया जाएगा। साथ ही, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इसके अलावा, बजट में जमीनी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से अगले तीन वर्षों में सभी जिला अस्पतालों में डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित करने की सुविधा भी प्रदान की गई है।

2018 से अब तक, जल जीवन मिशन के अंतर्गत 15 करोड़ परिवारों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा दी जा चुकी है। यह संख्या भारत की ग्रामीण आबादी का 80ः हिस्सा कवर करती है। 100ः कवरेज प्राप्त करने के लिए, जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ा दिया गया है, और इसके लिए बजट आवंटन को भी बढ़ाया गया है।

निरंतर आर्थिक वृद्धि और राजकोषीय समेकन

उन्होंने बताया मोदी सरकार को एक चरमराई हुई अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी, जिसमें उच्च गैर-निष्पादित संपत्तियाँ और संकटग्रस्त कॉर्पोरेट क्षेत्र प्रमुख समस्याएँ थीं। इसके बावजूद, सरकार ने सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा देने, पूंजीगत व्यय को क्रमिक रूप से बढ़ाने और लक्षित सार्वजनिक सेवा वितरण की तीन-स्तरीय नीति अपनाकर राजकोषीय समेकन को सफलतापूर्वक लागू किया है। इन्हीं सक्रिय नीतियों के कारण, वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती महंगाई के बावजूद भारत एक अपवाद बनकर उभरा है।

उन्होंने बताया वित्त वर्ष 2024-25 के लिए संशोधित अनुमान में राजकोषीय घाटा 4.8 प्रतिशत है, जो कि बजट अनुमान 4.9 प्रतिशत से नीचे आया है। इसी तरह, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी घाटे के लक्ष्य को और घटाकर 4.4 प्रतिशत किया गया है।

 

एम.एस.एम.ई क्षेत्र की अपार क्षमता का दोहन

श्री चौधरी ने कहा मोदी सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को ’डबल इंजन सरकार’ का दूसरा प्रमुख स्तंभ माना है। वर्तमान में, 1 करोड़ से अधिक पंजीकृत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम 7.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं। ये एम.एस.एम.ई देश में निर्मित कुल उत्पादों का 36 प्रतिशत योगदान देते हैं और कुल निर्यात का 45 प्रतिशत से अधिक उत्पन्न करते हैं। इन उद्यमों की दक्षता बढ़ाने के लिए, निवेश और टर्नओवर की सीमाओं को क्रमशः 2.5 गुना और 2 गुना बढ़ाया जाएगा।

श्री चौधरी ने कहा क्रेडिट की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, मध्यम और लघु उद्योगों के लिए क्रेडिट गारंटी कवर को 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किया गया है। इससे अगले पांच वर्षों में 1.5 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त ऋण सुविधा उपलब्ध होगी। स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी को 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये किया जाएगा, और गारंटी शुल्क को 27 क्षेत्रों में 1ः तक सीमित किया गया है। सूक्ष्म उद्यमों के लिए, 5 लाख रुपये की क्रेडिट लिमिट के साथ कस्टमाइज्ड क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे। पहले वर्ष में 10 लाख ऐसे कार्ड जारी किए जाएंगे। स्टार्टअप्स के लिए, 91,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता के साथ ’ऑटोमेटेड इन्वेस्टमेंट फंड’ पहले ही स्थापित किया जा चुका है।

अब, 10 हजार करोड़ रुपये के शुरुआती योगदान के साथ एक नया ’फंड ऑफ फंड्स’ स्थापित किया जाएगा। ये सभी उपाय भारतीय एम.एस.एम.ई को वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेंगे।

व्यापक और तीव्र गति से विनिर्माण विस्तार

श्री चौधरी ने बताया आर्थिक विकास और व्यापार के लिए औद्योगिक विस्तार अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए, इस बजट में उद्योगों और उनके संबद्ध क्षेत्रों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक समग्र रणनीति प्रस्तुत की गई है।

बजट ने भारतीय खिलौना उद्योग को भी पुनर्जीवित करने पर जोर दिया है। राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत, भारत को खिलौना उत्पादन में वैश्विक नेता बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए, खिलौना निर्माण के क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इससे इस क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा और अधिक नवीन व अनूठे खिलौनों के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा।

इसी प्रकार, बजट ने औद्योगिक विकास का लाभ उठाकर पूर्वी राज्यों में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए, बिहार में ’राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान’ स्थापित करने की घोषणा की गई है। अंततः, यह बजट ’मेक इन इंडिया’ योजना की सफलता को और आगे बढ़ाता है। इसके अंतर्गत, छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों के लिए राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन की शुरुआत की गई है। इस मिशन के अंतर्गत, राज्य सरकारों को नीति समर्थन और कार्यान्वयन रोडमैप प्रदान किया जाएगा।

इन्फ्रास्ट्रक्चर-आधारित दीर्घकालिक विकास

उन्होंने बताया मोदी सरकार ने विकसित भारत की मजबूत नींव रखने के लिए दीर्घकालिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास और पूंजीगत व्यय को अपनी प्राथमिकता बनाया है। इसी दिशा में, केंद्र सरकार के प्रत्येक इन्फ्रास्ट्रक्चर मंत्रालय को अगले तीन वर्षों की परियोजना पाइपलाइन तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इन परियोजनाओं को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के अंतर्गत लागू किया जाएगा। राज्यों को भी इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट डेवलपमेंट फंड के माध्यम से सहायता देकर इस दिशा में प्रोत्साहित किया जाएगा।

इस बजट में राज्यों को पूंजीगत व्यय के लिए 50 वर्ष की ब्याज मुक्त ऋण सहायता के रूप में ₹1.5 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह राशि राज्यों को भविष्य के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करने में मदद करेगी। पहली एसेट मोनेटाइजेशन योजना की सफलता को देखते हुए, सरकार ने दूसरी योजना 2025-2030 के लिए शुरू करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत, ₹10 लाख करोड़ की पूंजी को नए प्रोजेक्ट्स में लगाया जाएगा। एक निश्चित आकार से बड़े जहाजों को हार्मोनाइज्ड मास्टर लिस्ट में शामिल किया जाएगा।

उन्होंने बताया इसके अलावा, शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इन क्लस्टर्स में बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्किलिंग और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि अधिक श्रेणियों और बड़े जहाजों के निर्माण की क्षमता बढ़ाई जा सके। समुद्री उद्योग के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण की सुविधा प्रदान करने के लिए, सरकार ने ₹25,000 करोड़ के कोष के साथ ’मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड’ की घोषणा की है। इसमें 49 प्रतिशत योगदान केंद्र सरकार का होगा। पी पी पी मॉडल को और सशक्त बनाने तथा निजी क्षेत्र को बेहतर प्रोजेक्ट प्लानिंग में सहायता देने के लिए, सरकार च्ड गति शक्ति पोर्टल के माध्यम से प्रासंगिक डेटा और मैप्स तक पहुंच प्रदान करेगी

जलवायु अनुकूलन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता

उन्होंने बताया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 2022 में पंचामृत पर्यावरण लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्धता जताई थी। इसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए, इस बजट में नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन शुरू किया गया है। यह मिशन सौर च्ट सेल, इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी, मोटर और टरबाइन के घरेलू उत्पादन का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करेगा। बिजली वितरण और राज्य के भीतर ट्रांसमिशन को मजबूत करने के लिए राज्यों को सुधारों के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा। इन सुधारों से बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति और क्षमता में सुधार होगा। सुधार लागू होने पर राज्यों को उनकी सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 0.5 प्रतिशत अतिरिक्त उधार लेने की अनुमति दी जाएगी। भारत में 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा विकसित करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए परमाणु ऊर्जा अधिनियम और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम में संशोधन किया जाएगा। परमाणु नवाचार को बढ़ावा देने के लिए, बजट में ₹20,000 करोड़ का परमाणु ऊर्जा मिशन घोषित किया गया है। यह मिशन छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर के अनुसंधान और विकास को समर्थन देगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2033 तक कम से कम 5 पूरी तरह से परिचालन में आ जाएं।

भारतीय शहरों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना

उन्होंने कहा मोदी सरकार ने भारतीय शहरों को पुनर्कल्पित भारत के केंद्र के रूप में प्राथमिकता दी है। शहरी गरीबों और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए केंद्र सरकार ने एक नई योजना की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य शहरी श्रमिकों की आय और जीवन स्तर में सुधार करना है। यह उन्हें सतत आजीविका के अवसर प्रदान करेगी। पी एम स्वनिधि योजना की सफलता को देखते हुए, इसे और सशक्त बनाया जाएगा। अब तक 68 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को इस योजना का लाभ मिला है। नई योजना में बैंकों से बड़े ऋण, ₹30,000 की सीमा वाले न्च्प्-लिंक्ड क्रेडिट कार्ड और क्षमता निर्माण का समर्थन शामिल होगा। श्री चौधरी ने बताया शहरों को विकास केंद्र बनाने के लिए, सरकार 1 लाख करोड़ का अर्बन चैलेंज फंड स्थापित करेगी। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इसमें ₹ 10,000 करोड़ आवंटित किए जाएंगे। इस फंड से बैंकों द्वारा वित्तपोषण योग्य परियोजनाओं की कुल लागत का 25ः तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत उन्हीं परियोजनाओं को सहायता दी जाएगी जो निर्धारित मानदंडों को पूरा करती हैं।

 

निर्यात में निरंतर प्रगति से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ते कदम

श्री चौधरी ने बताया केंद्र सरकार ने निर्यात संवर्धन मिशन की घोषणा की है। इस मिशन के तहत विभिन्न क्षेत्रों और मंत्रालयों के लक्ष्यों को निर्धारित किया जाएगा। सरकार निर्यात ऋण, क्रॉस-बॉर्डर फैक्टरिंग और एम.एस.एम.ई. के लिए गैर-शुल्क बाधाओं से निपटने में सहायता प्रदान करेगी। भारत ट्रेड नेट नामक एक डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित की जाएगी। यह व्यापार दस्तावेजीकरण और वित्तपोषण के लिए एकीकृत मंच होगा। यह प्रणाली वैश्विक मानकों के अनुरूप होगी और यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म को सशक्त बनाएगी। मोदी सरकार द्वारा तैयार किया गया राष्ट्रीय ढांचा राज्यों को टियर-2 शहरों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर विकसित करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य प्रतिभा उपलब्धता, बुनियादी ढांचे और उद्योग सहयोग में सुधार करना है। निर्यात दक्षता बढ़ाने और परिवहन में होने वाले नुकसान को कम करने के लिए हवाई मालभाड़ा और गोदाम सुविधाओं को उन्नत किया जाएगा। इसमें महत्वपूर्ण मूल्य वाली नाशवंत बागवानी से जुड़ी संरचनाओं का भी विकास किया जाएगा।

नियामकीय सुधारों और महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के लिए मजबूत रोडमैप

श्री चौधरी ने बताया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहा है। सरकार सुशासन के माध्यम से नागरिकों के जीवन को आसान बनाने और उनके महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इस बजट में आधारित सिद्धांतों और विश्वास पर आधारित हल्का नियामकीय ढांचा प्रस्तुत किया गया है। इससे आने वाले दशकों में उत्पादकता और रोजगार में वृद्धि होगी। नियामकीय सुधारों की उच्च-स्तरीय समिति गठित की जाएगी। यह गैर-वित्तीय क्षेत्र की सभी नियमावलियों, प्रमाणपत्रों, लाइसेंसों और अनुमतियों की समीक्षा करेगी। इसका उद्देश्य विश्वास-आधारित आर्थिक प्रशासन को मजबूत करना और निरीक्षण एवं अनुपालन के मामलों में व्यवसाय करने में आसानी को बढ़ाना है। 2025 में निवेश अनुकूलता सूचकांक लॉन्च किया जाएगा। इससे प्रतिस्पर्धी सहकारी संघवाद की भावना को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अतिरिक्त, मोदी सरकार ’जन विश्वास अधिनियम 2.0 पेश करेगी। इसके अंतर्गत 100 से अधिक विधायी प्रावधानों में अपराधों को गैर-अपराधीकरण किया जाएगा। इसका उद्देश्य व्यवसाय करने में आसानी बढ़ाना और नागरिकों के समग्र कल्याण को सुनिश्चित करना है।

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