नई दिल्ली/इस्लामाबाद, भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते तोड़ने के फैसले से पाकिस्तान को भारी आर्थिक तबाही का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान-इंडिया बिजनेस काउंसिल (PIBC) के अध्यक्ष नूर मोहम्मद कसूरी ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार बंद होने से पाकिस्तान को अब तक लगभग 40 अरब डॉलर (₹4,000 करोड़ डॉलर) का सीधा नुकसान हुआ है। कसूरी ने दोनों देशों से व्यापार फिर से शुरू करने की गुहार लगाते हुए कहा कि भारत से आयात बंद होने के कारण पाकिस्तानी कंपनियों को आवश्यक कच्चा माल अन्य देशों से महंगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है।
दवा और कपड़ा उद्योग पर पड़ी सबसे बड़ी मार, ब्राजील व अमेरिका से महंगे दामों पर कपास खरीदने को विवश हुआ पाक
व्यापार रुकने का सबसे बुरा असर पाकिस्तान के फार्मास्यूटिकल (दवा) और टेक्सटाइल (कपड़ा) सेक्टर पर पड़ा है। कसूरी के अनुसार, दवा निर्माण के लिए जरूरी कच्चा माल पहले भारत से सस्ते में आता था, लेकिन अब दूसरे देशों से मंगाने के कारण लागत काफी बढ़ गई है। इसी तरह, स्थानीय स्तर पर कपास उत्पादन घटने के कारण पाकिस्तानी कपड़ा मिलों को ब्राजील, मिस्र, चीन और अमेरिका से करीब 500 करोड़ डॉलर अतिरिक्त खर्च करके कपास आयात करनी पड़ रही है। यदि भारत से आयात-निर्यात बहाल होता है तो पाकिस्तान अकेले दवा और कृषि क्षेत्र में ही सालाना 200 से 300 करोड़ डॉलर तक की बचत कर सकता है।
पेट्रोलियम, चीनी, खाद और मशीनरी के लिए भारत पर निर्भरता जरूरी, कसूरी ने की राजनीतिक मतभेद भुलाकर बातचीत की अपील
नूर मोहम्मद कसूरी ने कहा कि भौगोलिक नजदीकी के कारण भारत की तेल रिफाइनरियों से पेट्रोलियम उत्पाद, चीनी, खाद, सीमेंट, लोहा-इस्पात और सब्जियां मंगाना पाकिस्तान के लिए बेहद सस्ता और सुलभ है। उन्होंने बल देकर कहा कि दोनों देशों को अपने पुराने राजनीतिक विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए और आर्थिक सहयोग में राजनीति को आड़े नहीं आने देना चाहिए। व्यापारिक रिश्ते बहाल होने से न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा, बल्कि पर्यटन, निवेश और सीमा पार धार्मिक यात्राओं के भी नए रास्ते खुलेंगे।

