रीवा:संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय परिसर में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नई पहल की गई है। अब अस्पताल परिसर में नया डंपिंग यार्ड बनाया जाएगा। अभी तक निर्धारित डंपिंग यार्ड नहीं होने के कारण अस्पताल का म्युनिसिपल वेस्ट चीरघर के पास फेंका जा रहा था।
आवारा पशुओं से फैल रही थी गंदगी, नई व्यवस्था से स्वच्छता में होगा सुधार
चीरघर के पास कचरा फेंके जाने से वहां आवारा पशु खाद्य सामग्री सहित कचरे को पूरे परिसर में फैला देते थे। इससे गंदगी फैलने के साथ ही अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था भी प्रभावित हो रही थी। समस्या को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मानसिक रोग विभाग के बगल में डंपिंग यार्ड बनाने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अस्पताल से निकलने वाले म्युनिसिपल वेस्ट को निर्धारित स्थान पर एकत्र किया जाएगा। इसके बाद कचरा उठाव का कार्य करने वाली एजेंसी कंपनी इसे वहां से उठाएगी। इससे परिसर में जगह-जगह कचरा फेंकने की समस्या पर अंकुश लगने और स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।
जीएमएच गेट पर परिजनों के बैठने की नई व्यवस्था, बायोमेडिकल वेस्ट के लिए पहले से है अलग यार्ड
उधर संजय गांधी अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले परिजनों की सुविधा के लिए भी व्यवस्था की गई है। अस्पताल में मरीजों की देखभाल और भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से प्रवेश पास की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत एक मरीज के साथ केवल दो लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। ऐसी स्थिति में मरीज के साथ आए अन्य परिजनों को बाहर इंतजार करना पड़ता था। परिजनों की इस परेशानी को देखते हुए गांधी मेमोरियल अस्पताल के गेट पर उनके बैठने की व्यवस्था की गई है। इससे मरीजों के साथ आए लोगों को इंतजार के दौरान राहत मिलेगी।
गौरतलब है कि म्युनिसिपल वेस्ट में मुख्य रूप से खाद्य सामग्री और सामान्य कचरा शामिल होता है जबकि अस्पताल से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के निपटान के लिए अलग यार्ड पहले से बना हुआ है। बायोमेडिकल वेस्ट को निर्धारित प्रक्रिया के तहत गुड़ स्थित संयंत्र में निस्तारण के लिए भेजा जाता है। ऐसे में दोनों तरह के कचरे के लिए अलग-अलग व्यवस्था होने से अपशिष्ट प्रबंधन को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
