नयी दिल्ली, 31 अक्टूबर (वार्ता) केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने ‘आत्मनिर्भर पंचायतों’ और ‘विकसित पंचायतों’ को प्राप्त करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों में सभी हितधारकों की भागीदारी का आह्वान किया है।
श्री सिंह ने सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने, जमीनी स्तर पर चर्चा और विचार-विमर्श को बढ़ावा देने, एक सामान्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभागों में केंद्र और राज्य की योजनाओं को एकीकृत करने, ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) की समय पर तैयारी सुनिश्चित करने और प्रभावी जमीनी स्तर पर शासन के लिए पंचायत प्रतिनिधियों और हितधारकों की क्षमताओं का निर्माण करने की आवश्यकता जतायी है।
श्री सिंह शुक्रवार को यहां पंचायती राज मंत्रालय की ओर से आयोजित जन योजना अभियान (पीपीसी) 2026-27 पर राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इसमें देश भर से 400 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान, पीपीसी 2026-27 पुस्तिका का भी विमोचन किया गया। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने पूरे देश में पंचायत भूमि पर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए विद्युत मंत्रालय के तहत एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए।
उन्होंने प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (पीएम वीजीएसवाई) को मंजूरी देने वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल के ऐतिहासिक निर्णय के बारे में जानकारी दी, जो विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जुड़ी अगली पीढ़ी की शासन परिवर्तन पहल है। पीएम वीजीएसवाई के प्रमुख उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए, उन्होंने कहा कि पीएम वीजीएसवाई की मंजूरी लोकतंत्र की नींव के रूप में पंचायतों में सरकार के दृढ़ विश्वास को दर्शाती है और यह मानती है कि विकसित भारत के दृष्टिकोण को केवल विकसित पंचायतों के माध्यम से ही साकार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पंचायतें वास्तव में आत्मनिर्भर बन जाती हैं, जब ग्राम सभाएं विश्वास के साथ योजना बनाती हैं, स्वयं के स्रोत राजस्व (ओएसआर) में लगातार वृद्धि होती है और सरकार का हर स्तर अभिसरण में काम करता है। ग्राम पंचायतों को प्रदर्शन अनुदान के लिए पात्र बनने के लिए अपने स्वयं के स्रोत राजस्व सृजन को बढ़ाने की आवश्यकता का उल्लेख करते हुए उन्होंने उनसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ‘आत्मनिर्भर पंचायत’ के संकल्प की दिशा में काम करने का आग्रह किया।
केंद्रीय मंत्री ने सभी हितधारकों से पंचायतों को मजबूत करने और उन्हें राजस्व के स्थायी स्रोतों का पता लगाने में सक्षम बनाने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया, यह सुनिश्चित करते हुए कि स्थानीय विकास स्थानीय प्राथमिकताओं से प्रेरित हो। उन्होंने कहा कि दो अक्टूबर को शुरू किए गए जन योजना अभियान (पीपीसी) 2026-27 ने नागरिकों को योजना प्रक्रिया के केंद्र में रखा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के अनुसार भागीदारी योजना, डिजिटल प्लेटफॉर्म और जनभागीदारी के महत्व पर जोर दिया।
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव डॉ. विनीत जोशी ने इस मौके पर कहा कि पीएम वीजीएसवाई पर कैबिनेट का निर्णय विकेंद्रीकृत, साक्ष्य-आधारित योजना के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि ‘सबकी योजना, सबका विकास’ विषय के अंतर्गत 2018 से मंत्रालय द्वारा चलाया जा रहा पीपीसी ग्राम, ब्लॉक और जिला पंचायत विकास योजनाओं की तैयारी, सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण और योजनाओं और संसाधनों के अभिसरण के लिए एक मजबूत ढांचे के रूप में विकसित हुआ है।
संरचित, सहभागी और समावेशी योजना पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि सोलहवें वित्त आयोग ने 2026-31 की अवधि के लिए सभी 28 राज्यों में विधिवत गठित पंचायती राज संस्थानों/ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए कुल 4,35,236 करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है। इससे धन का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों पर अधिक जिम्मेदारी रखी गई है।
पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के. के. मीणा ने कहा कि पेयजल और स्वच्छता सेवाओं के निरंतर वितरण को सुनिश्चित करने में पंचायतों की केंद्रीय भूमिका है, जो सीधे स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़ी हुई है। उन्होंने जल और अपशिष्ट प्रबंधन में ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र किया और पीएम वीजीएसवाई के माध्यम से उनके प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर जोर दिया।
पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव पलका साहनी ने विषयगत पंचायत विकास योजनाओं के माध्यम से हुई प्रगति और स्थानीय विकास प्राथमिकताओं के प्रति उनकी गुणवत्ता, व्यापकता और जवाबदेही को और मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे ने समग्र ग्रामीण विकास सुनिश्चित करने के लिए व्यापक और अभिसरण ग्राम पंचायत विकास योजनाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यशाला के बाद वित्त वर्ष 2027-28 के लिए गुणवत्तापूर्ण, सहभागी और अभिसरण विकास योजनाएं तैयार करने में पंचायतों का मार्गदर्शन करने के लिए राज्य-, जिला और ब्लॉक-स्तरीय अभिविन्यास आयोजित किए जाएंगे।
पंचायतों की वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने और भारत के स्वच्छ ऊर्जा एजेंडे को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायत भूमि पर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (ईईएसएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन पर श्री सिंह और श्री जोशी की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव मुक्ता शेखर और सीईएसएल के निदेशक अखिलेश कुमार दीक्षित ने समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया।

