
भोपाल। मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी के लिए इस्तेमाल होने वाले गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के जरिए हुई वित्तीय अनियमितताओं पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। नगरीय प्रशासन विभाग की समीक्षा में सामने आए 1,134 करोड़ रुपये के खरीदी संबंधी घोटाले के मामले में 392 अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें 135 मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) शामिल हैं। गंभीर अनियमितताओं के मामलों में 7 कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है, जबकि 76 अधिकारियों-कर्मचारियों की वेतनवृद्धि रोकने और 17 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन में कटौती के आदेश जारी किए गए हैं। दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों से 3 से 4 करोड़ रुपये की सरकारी राशि वसूलने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
कीमतों में भारी अंतर से सामने आई अनियमितता
नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे और राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी की उच्चस्तरीय समीक्षा में खरीदी की प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। विभागीय जांच के अनुसार, निकायों में नियमों को ताक पर रखकर सामान की खरीदी की गई। इससे सरकारी खजाने को करीब 250 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
जांच में सामने आया कि बाजार में करीब 306 रुपये कीमत वाली एलईडी लाइट निकायों में 11,800 रुपये तक में खरीदी गई। इसी तरह, सामान्य कचरा गाड़ी की कीमत करीब 2 लाख रुपये होने के बावजूद उसमें चार डस्टबिन जोड़कर 6 लाख रुपये तक में खरीदा गया। कुछ छोटे निकायों में जरूरत के आकलन के बिना 1.5-1.5 करोड़ रुपये की कचरा गाड़ियों की खरीदी भी की गई। फिनाइल जैसे सामान्य सामान की खरीदी में भी निर्धारित कीमतों से अधिक भुगतान के मामले सामने आए।
62 मामलों की समीक्षा के बाद कार्रवाई
वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े 62 मामलों की समीक्षा के बाद विभाग ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। सात कर्मचारियों को गंभीर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप में बर्खास्त किया गया है। वहीं, 76 अधिकारियों-कर्मचारियों की वेतनवृद्धि रोकने के आदेश जारी किए गए हैं। सेवानिवृत्त हो चुके 17 कर्मचारियों की पेंशन में भी उनके कार्यकाल में हुई अनियमितताओं के आधार पर कटौती की जाएगी।
सरकार ने दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों से 3 से 4 करोड़ रुपये की राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी खरीदी में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और वित्तीय अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना है।
