इंदौर: कमजोर मानसून के कारण सामान्य से करीब 14 इंच कम हुई बारिश ने शहर के जल प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है. समय रहते जल संरक्षण के ठोस उपाय नहीं हुए तो आने वाले महीनों में पेयजल संकट गंभीर हो सकता है. इस संबंध में पर्यावरणविदों ने चिंता जाहिर की है.कम बारिश का असर जलस्रोतों पर पड़ने के साथ आने वाले ग्रीष्मकाल में शहर की जलापूर्ति के लिए चुनौती बन सकता है. यदि अभी से पानी की खपत नियंत्रित नहीं की गई और उपलब्ध जल का संरक्षण नहीं हुआ तो कई क्षेत्रों में कम दबाव, सीमित आपूर्ति और टैंकरों पर निर्भरता बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं.
इसका सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ेगा, जिन्हें पहले से पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता. नागरिकों को नल खुला छोड़ने, पाइप से वाहन धोने और अनावश्यक पानी खर्च करने से बचना होगा, घरों और अपार्टमेंट में वर्षा जल संचयन तथा इस्तेमाल किए जा सकने वाले पानी का पुनः उपयोग भी जरूरी है. लेकिन सवाल नगर निगम के अधिकारियों से भी है. कम बारिश की आशंका के बावजूद जलस्रोतों के संरक्षण, पाइपलाइन लीकेज रोकने और भूजल रिचार्ज के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए? क्या आगामी गर्मियों की कोई प्रभावी कार्ययोजना तैयार है? लापरवाही जारी रही तो संकट गहराने के साथ पानी के लिए विवाद और आर्थिक बोझ भी बढ़ सकता है.
यह बोले पर्यावरणविद्…
सर्विस सेंटर बंद किए गए तो सैकड़ों लोग बेरोजगार हो जाएंगे, पानी की बचत के प्रयास को लेकर उन्हें विकल्प दिए जाएं या फिल्टर मशीन लगवाने के आदेश दिए जाएं.
– रामजी साकेत, अधिवक्ता एवं सलाहकार पर्यावरण हितैषी फाउंडेशन
समाजसेवी संगठनों को अपने क्षेत्र में सक्रिय होकर प्रशासन के साथ जागरूकता अभियान चलाना होगा. प्रशासन पानी संग्रह की हफ्तेवार रिपोर्ट पब्लिश करे, ताकि लोग पानी खर्च पर सचेत रहें.
– डॉ. सुनील चतुर्वेदी, विभावरी अमृत जल संचय अभियान
जल संकट को जन-अभियान बनाया जाए. साथ ही जल को मुनाफे की वस्तु से साझा सामाजिक संसाधन बनाना चाहिए. हर मोहल्ले में जल-बर्बादी पर रोको-टोको अभियान चलाया जाए, निगरानी अत्यंत आवश्यक है.
– संदीप खानवलकर, पर्यावरण प्रेमी मंच
