सतना:सतना और मैहर वन क्षेत्र की हजारों हेक्टेयर की बहुमूल्य वन भूमि इस समय अवैध अतिक्रमण की चपेट में है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र की कुल 19,995 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा जमाया जा चुका है. जो पर्यावरण और वन संरक्षण के दृष्टिकोण से एक बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है.
विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस वर्ष सतना वनमंडल में अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए कुल 75 नए प्रकरण दर्ज किए गए हैं. इस दौरान वन विभाग की टीम ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए 962.35 हेक्टेयर वन भूमि को भू-माफिया और अवैध कब्जेधारियों के चंगुल से मुक्त कराया गया है.
प्रशासनिक प्रयासों और हालिया बेदखली कार्रवाई के बावजूद, सतना और मैहर के जंगलों की विशाल भू-संपदा को अतिक्रमण से पूरी तरह मुक्त कराना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में भी लगभग 19,032.65 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण बरकरार है. इतने विशाल भू-भाग पर कब्जा होने से न केवल वन्यजीवों के प्राकृतिक पर्यावास पर संकट गहरा रहा है, बल्कि क्षेत्र का जल स्तर और जैविक संतुलन भी प्रभावित हो रहा है.
सुरक्षा पर उठ रहे गंभीर सवाल
वन भूमि पर इतने बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण ने वन विभाग की वन भूमि की सुरक्षा और व्यवस्था के इंतजामों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. स्थानीय पर्यावरणविदों का मानना है कि दिनों दिन वन भूमि पर अवैध कब्जे बढ़ते ही जा रहे हैं लेकिन वन अमला इसके लिए ठोस कदम नहीं उठा रहा है. कई बार भू माफिया वन क्षेत्र की सीमा से जुड़े क्षेत्रों पर वन भूमि पर अतिक्रमण कर कृषि कार्य सुरु कर रहे हैं. लेकिन नक्शे का हवाला देकर राजस्व भूमि और वन भूमि पर मामला लटका दिया जाता है. वन अमले को वन भूमि को जल्द से जल्द अतिक्रमण मुक्त कराने की जरूरत है.
नियमों को ताक पर रख बाँटे गए पट्टे.
हजारों हेक्टेयर अतिक्रमित वन भूमि के कई भूखंड विभागीय तकनीकी समस्याओं में उलझे हुए हैं जिम्मेदारों से मिली जानकारी के अनुसार दशकों पहले कई वन भू खंडों पर राजस्व विभाग द्वारा पट्टे जारी किए गए थे. उन्ही का सहारा लेकर अवैध कब्जा धारी वन भूमि पर अपने स्वामित्व का दावा करते हैं जब की मध्य प्रदेश भूमि राजस्व संहिता (एमपीएलआरसी ) 1959 की धारा 1 (धारा 1 की उप-धारा 2) के अनुसार, यह संहिता संपूर्ण मध्य प्रदेश पर लागू होती है, लेकिन भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत आरक्षित या संरक्षित वन के रूप में गठित क्षेत्रों पर यह संहिता लागू नहीं होती बजूद पूर्ववर्ती प्रशासनिक जिम्मेदारों ने वन भूमि पर पट्टे जारी किए जो कि एमपीएलआरसी की धारा 1 की अप धारा 2 का उलंघन करती है.
इनका कहना है
संभागीय वन अधिकारी मयंक चांदीवाल ने कहा की लगभग हज़ार हेक्टेयटर वन भूमि का अतिक्रमण विभाग द्वारा हटवा कर उस पर पेड़ लगाये गए हैं. उनकी प्राथमिकता वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा कर ज़्यादा से ज़्यादा वन क्षेत्र में वृक्षा रोपण कराना है. ताकि वन्य जीवों के लिए वन्य क्षेत्र बढ़े और वन भूमि भी सुरक्षित हो सके. पूर्व में राजस्व बिभाग द्वारा जो पट्टे जारी किए गए थे उनकी जाँच की जा रही है किसी तकनीकी समस्या के कारण पट्टा नियम विरुद्ध पाया जाता है तो पट्टा अलग से निरस्त कराने राजस्व विभाग एवं कलेक्टर महोदय के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत कर इसे भी अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा. – मयंक चाँदीवाल (डीएफओ)
