जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष धन्य कुमार जैन ने उच्चतम न्यायालय में अपने विरुद्ध चल रहे आपराधिक अवमानना प्रकरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। अपनी शिकायत में उन्होंने न्यायपालिका के वरिष्ठ पदाधिकारियों और बार काउंसिल ऑफ इंडिया की भूमिका पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति तथा विभिन्न राजनीतिक दलों से मामले पर विचार करने और उचित हस्तक्षेप की अपील की है। जैन के अनुसार, वर्ष 2026-30 के मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद चुनाव में सदस्य पद के लिए उनका नामांकन नियमविरुद्ध तरीके से निरस्त किया गया था, जिसके खिलाफ उन्होंने शिकायतें करने के साथ उच्चतम न्यायालय में याचिका भी दायर की थी।
जैन ने आरोप लगाया कि 27 अप्रैल 2026 को उच्चतम न्यायालय की खुली अदालत में उनके संबंध में कठोर टिप्पणियां की गईं और 30 अप्रैल को उनके विरुद्ध प्रस्तुत याचिका क्रमांक 157/2026 पर आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया गया। उन्होंने दावा किया कि उनके विरुद्ध कार्यवाही आवश्यक अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई। जैन ने यह भी आरोप लगाया कि उन पर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया। हालांकि, उनके पत्र में इस्तीफे की तारीख 30 अप्रैल 2020 लिखी गई है, जो अन्य घटनाओं के वर्ष 2026 होने से मेल नहीं खाती। इस तारीख की पुष्टि आवश्यक है।
अपनी शिकायत में जैन ने यह भी कहा है कि आर्थिक कठिनाइयों के चलते उन्होंने उच्चतम न्यायालय में पैरवी के लिए विधिक सहायता के तहत अधिवक्ता उपलब्ध कराने का आवेदन दिया, लेकिन उन्हें अब तक सहायता नहीं मिली। उन्होंने 15 अक्टूबर 2026 को जारी कथित नोटिस पर भी आपत्ति जताते हुए न्यायपालिका की शक्तियों के इस्तेमाल और अवमानना संबंधी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है। जैन द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए उच्चतम न्यायालय के संबंधित आदेशों, याचिकाओं और नोटिस के साथ संबंधित पक्षों का पक्ष जानना आवश्यक होगा।
