नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (वार्ता) मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शुक्रवार से मछली निवेशक एवं निर्यातक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अंतर्देशीय मछली उत्पादन को निवेश, प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज, मूल्यवर्धन और निर्यात बाजारों से जोड़ने के लिए बेहतर तालमेल बैठाना है। यहां जारी एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी है। इसमें बताया गया है कि इस सम्मेलन का आयोजन मध्य प्रदेश सरकार का मछली पालन विभाग कर रहा है। इसका मकसद खास तौर पर उत्पादन-केंद्रित नजरिए से आगे बढ़कर एकीकृत मूल्य श्रृंखला मॉडल को बढ़ावा देना है, जिसमें मछुआरों और मछली पालकों की बाजार तक पहुंच और उनकी आमदनी में इजाफे पर खास ध्यान दिया जाएगा।
इस कॉन्क्लेव में निवेशकों, निर्यातकों, मछुआरों, मध्य प्रदेश के कई इलाकों से आए 1,000 से अधिक मछली पालकों, मछली सहकारी समितियों, मछली पालक उत्पादक संगठनों, उद्यमियों, स्टार्टअप, प्रसंस्करणकर्ताओं, वित्तीय संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और अन्य हितधारकों के शामिल होने की संभावना है। इसमें कामकाज के विकास, पैसे का बंदोबस्त, बाजार संपर्क और अंतर्देशीय मछली पालन की पूरी मूल्य श्रृंख्ला में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस दौरान अंतर्देशीय राज्यों को मछली पालन में निवेश और निर्यात की व्यवस्था से जोड़ने पर विशेष बल दिया जाएगा।
इस कॉन्क्लेव के दौरान ‘मध्य प्रदेश मछली पालन निवेश एवं निर्यात दिशा-निर्देश, 2026’ का भी विमोचन किया जाएगा। केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को जलाशय मछली पालन क्लस्टर के रूप में चुना है। इस नीति का उद्देश्य मछली पालन के प्रमुख क्षेत्रों में निवेश को सुगम बनाना है। इनमें मछली बीज उत्पादन केंद्र, मछली बीज एवं आहार, जलाशय एवं केज मछली पालन, जलीय जीवों का स्वास्थ्य प्रबंधन, प्रसंस्करण, शीत शृंखला अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, मूल्यवर्धन और बाजार विकास शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान अंतर्देशीय राज्यों की निर्यात क्षमता पर मानक संचालन प्रक्रियाओं का विमोचन और एकीकृत केज कल्चर इकाइयों का ऑनलाइन उद्घाटन भी किया जाएगा। लगभग 4.50 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र के साथ मध्य प्रदेश में अंतर्देशीय मछली पालन के विकास की अपार संभावनाएं हैं।
इस अवसर पर केंद्रीय मछली पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह मध्य प्रदेश में जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास के लिए प्रशासनिक स्वीकृति पत्र सौंपेंगे। इन पहलों से अंतर्देशीय मछली पालन में निवेश को बढ़ावा मिलने, जल संसाधनों के उत्पादक उपयोग को प्रोत्साहन मिलने और उद्यम विकास को गति मिलने की आशा है। देश में बढ़ रहे मछली पालन क्षेत्र तथा खाद्य सुरक्षा, आजीविका और निर्यात आय में इसके बढ़ते योगदान के संदर्भ में यह कॉन्क्लेव विशेष महत्व रखता है। वर्ष 2024-25 में भारत का कुल मछली उत्पादन 197.75 लाख टन तक पहुंच गया, जिसमें 151.60 लाख टन उत्पादन अंतर्देशीय मछली पालन से हुआ। यह देश के कुल मछली उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई है। वर्ष 2025-26 में समुद्री खाद्य निर्यात 73,890 करोड़ रुपये मूल्य रहा। ये आंकड़े अंतर्देशीय मछली पालन की संभावनाओं का पूरा लाभ उठाने के लिए अवसंरचना, प्रसंस्करण क्षमताओं और बाजार संपर्कों को सुदृढ़ करने के महत्व को रेखांकित करते हैं।

