नई दिल्ली, आयकर अधिनियम, 2025 के तहत अचल संपत्ति खरीदने वालों, किराये पर रहने वाले लोगों और पेशेवरों व ठेकेदारों को भुगतान करने वाले करदाताओं के लिए एक बड़ा राहत भरा बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने टीडीएस (TDS) की जटिल रिपोर्टिंग प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए पुराने चार अलग-अलग फॉर्मों (26QB, 26QC, 26QD और 26QE) को समाप्त कर उनकी जगह एक नया एकीकृत ‘फॉर्म 141’ पेश किया है। आगामी वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने जा रही इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य करदाताओं को अलग-अलग पोर्टल व फॉर्म तलाशने की झंझट से मुक्ति दिलाना और टैक्स व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित और डिजिटल बनाना है।
मकान खरीदारों, किरायेदार भुगतानकर्ताओं और डिजिटल एसेट ट्रांसफर के लिए फॉर्म 141 में दिए गए अलग-अलग समर्पित शेड्यूल
नये एकीकृत फॉर्म 141 के अंतर्गत अलग-अलग प्रकार के वित्तीय लेनदेन के लिए विशेष शेड्यूल निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत अचल संपत्ति (50 लाख रुपये या उससे अधिक) की खरीद पर कटने वाले टीडीएस की रिपोर्टिंग ‘शेड्यूल बी’ के तहत होगी, जबकि मकान मालिक को दिए जाने वाले किराये पर टीडीएस की जानकारी ‘शेड्यूल ए’ में दी जाएगी। इसके अलावा, ठेकेदारों व पेशेवरों को किए जाने वाले भुगतानों के लिए ‘शेड्यूल सी’ और क्रिप्टोकरेंसी व वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के हस्तांतरण पर लागू टीडीएस के लिए ‘शेड्यूल डी’ बनाया गया है। 1 अक्टूबर 2026 से गैर-निवासी विक्रेताओं से संपत्ति खरीदने के मामलों के लिए ‘शेड्यूल ई’ भी जोड़ दिया गया है।
आयकर पोर्टल के ‘ई-पे टैक्स’ से आसानी से भरा जा सकेगा नया फॉर्म, टीडीएस की मूल दरों और सीमाओं में नहीं हुआ कोई बदलाव
करदाता आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करके ‘ई-पे टैक्स’ विकल्प के जरिए आसानी से नया फॉर्म 141 भर सकेंगे। हालांकि, विशेषज्ञों और आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि नए एकीकृत फॉर्म के आने से टीडीएस की मूल दरों या लागू होने वाली तय मौद्रिक सीमाओं (जैसे संपत्ति पर 1% टीडीएस नियम) में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 1 अप्रैल 2026 से पहले के पुराने वित्तीय लेनदेन के लिए पूर्ववर्ती नियम और फॉर्म ही प्रासंगिक रहेंगे, इसलिए करदाताओं को भुगतान की तारीख के अनुसार सही फॉर्म और सही शेड्यूल का चयन करके ही टीडीएस रिपोर्टिंग पूर्ण करनी होगी।

