सीहोर। जिले में इस साल औसत से कम बारिश का असर अब रबी फसलों की बोवनी पर दिखाई देने लगा है. अल्पवर्षा के चलते गेहूं की बोवनी का रकबा पिछले साल के मुकाबले करीब 12,390 हेक्टेयर घट गया है, जबकि चने के रकबे में 8,900 हेक्टेयर की वृद्धि का अनुमान है. कृषि विभाग ने इस साल रबी की कुल बोवनी के लिए 4 लाख 160 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है. जिले में बोवनी की तैयारियां शुरू हो गई हैं .किसान नमी के अनुसार खेत तैयार करने में जुटे हैं.
जिले में इस बार 865.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 1057.3 मिलीमीटर वर्षा हुई थी. इस तरह पिछले साल की तुलना में करीब 191.7 मिलीमीटर कम बारिश हुई है. जिले की औसत वर्षा 1148.4 मिलीमीटर है. सामान्य से कम बारिश के कारण इस बार करीब 282.8 मिलीमीटर कम वर्षा हुई है. बारिश की कमी से खेतों में नमी नहीं होने के कारण किसानों को रबी फसलों की बोवनी के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है. हालांकि शनिवार से जिले में मावठे की छिटपुट बारिश हो रही है. बुधवार की शाम को भी पानी बरसा, लेकिन यह फसलों के लिए नाकाफी है.
रबी की बोवनी के लिए यूरिया और अन्य खाद की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध होने के बावजूद किसानों को खाद लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. खाद वितरण में टोकन व्यवस्था के कारण किसानों को लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है. व्यवस्था के तहत किसानों को टोकन जारी किए जाते हैं, लेकिन कई किसानों का कहना है कि रकबा पोर्टल पर कम दर्ज दिखाई देने के कारण उन्हें जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही है. इसके चलते किसानों को खाद खरीदने के लिए दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.
मामले में उप संचालक कृषि एके उपाध्याय का कहना है कि इस साल जिले में कम बारिश होने के कारण गेहूं का रकबा कम हुआ है. इसकी जगह चने व अन्य फसलों का रकबा बढ़ाया गया है. इस बार कुल रकबा 4 लाख 160 हैक्टेयर निर्धारित किया गया है.
बाजार में चने के बीज की बढ़ी मांग
इस बार चने की बोवनी को लेकर किसानों की मांग बढ़ी है। बाजार में चने के बीज की बिक्री 10 से 15 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक बताई जा रही है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसानों को बीज खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए. बोवनी के लिए प्रमाणित और अच्छी किस्म के बीज का चयन करना जरूरी है. बीज उपचार के बाद बोवनी करने से फसल को रोगों से बचाया जा सकता है. कृषि विभाग के अनुसार किसान उपलब्ध नमी और खेत की स्थिति को देखते हुए बोवनी करें, ताकि कम बारिश के असर को कुछ हद तक कम किया जा सके.
गेहूं की बोवनी में रिस्क नहीं लेना चाहते किसान
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल जिले में 3 लाख 66 हजार 980 हेक्टेयर में गेहूं की बोवनी हुई थी, जबकि इस साल 3 लाख 54 हजार 590 हेक्टेयर में गेहूं बोने का अनुमान है. इस तरह गेहूं का रकबा 12,390 हेक्टेयर कम हुआ है. इसके विपरीत चने का रकबा पिछले साल के 21,100 हेक्टेयर से बढ़कर इस साल 30 हजार हेक्टेयर होने का अनुमान है. यानी चने की बोवनी में 8,900 हेक्टेयर की वृद्धि संभावित है. अन्य फसलों में जौ का रकबा 1,150 से घटकर 1,000 हेक्टेयर, मक्का का 350 से बढ़कर 1,000 हेक्टेयर, मसूर का 7,100 से बढ़कर 10 हजार हेक्टेयर और मटर का 280 से बढ़कर 300 हेक्टेयर होने का अनुमान है. सरसों का रकबा 3,490 से बढ़कर 3,500 हेक्टेयर, अलसी का 100 हेक्टेयर पर स्थिर और मसाला फसल राई का रकबा 350 से बढ़कर 400 हेक्टेयर रहने का अनुमान है.
बीज की मांग और उपलब्धता में अंतर
जिले में रबी फसलों की बोवनी के लिए बीज की मांग और उपलब्धता के आंकड़ों में भी अंतर सामने आया है. गेहूं के लिए 1 लाख 6 हजार 200 क्विंटल बीज की मांग के मुकाबले 92 हजार 575 क्विंटल उपलब्धता दर्ज की गई है. चने की मांग 6,050 क्विंटल के मुकाबले 10,507 क्विंटल बीज उपलब्ध है. मसूर की मांग 1,500 क्विंटल के मुकाबले 1,405 क्विंटल, सरसों की 705 के मुकाबले 610 क्विंटल और मटर की 105 के मुकाबले 80 क्विंटल उपलब्धता है. अलसी की मांग 147 क्विंटल के मुकाबले 651 क्विंटल बीज उपलब्ध बताया गया है.
