जीरापुर। दशहरा मैदान में रावण दहन के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई. भगवान राम की सवारी पहुंचने से पहले ही 51 फीट का रावण धू-धू कर जल उठा. मानों रघुवर के आने से पहले ही रावण ने अग्रिसमाधि ले ली.
घटना के बाद दशहरा मैदान मैदान में हडक़ंप मच गया. दरअसल हर वर्ष परम्परा अनुसार रामलीला परिसर से राम सवारी तथा भगवान के विमान भव्य राम सवारी के रूप में दशहरा मैदान पहुंचते हैं जहां पर आतिशबाजी के साथ भगवान राम रावण के पुतले पर तीर चलाकर दहन करते हैं. लेकिन आश्चर्य जब हुआ कि लाखों रुपए खर्च कर बनाए गए इस विशाल पुतले को अव्यवस्थाओं का शिकार होना पड़ा.
पूरा मामला जन चर्चा का विषय बना रहा कि परिषद ने आतिशबाजी की व्यवस्था रावण के नजदीक में कर रखी थी. इसी बीच एक चिंगारी उठी और देखते ही देखते पूरा पुतला स्वाहा हो गया. मौके पर हजारों की भीड़ मौजूद थी. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के हाथों में मोबाइल थे, जो इस ऐतिहासिक पल को कैद कर रहे थे. लेकिन आंखों के सामने रावण जलता देख लोगों का सारा जोश ठंडा पड़ गया. भीड़ में मायूसी छा गई और हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
इस पूरे मामले के बाद नगर परिषद की तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं. सुरक्षा का होमवर्क क्यों नहीं किया गया. आतिशबाजी रावण से दूर क्यों नहीं लगाई गई. हजारों की भीड़ में फायर सेफ्टी के क्या इंतजाम थे.
किरकिरी के बाद जागी परिषद
फिर हुआ रावण के प्रतिकात्मक पुतले का वध और दहन जमकर किरकिरी होने के बाद नगर परिषद ने तत्काल फ्लेक्स पर रावण का सिर तथा कपड़े तथा घास पुस्टे से आनन-फानन में दूसरा पुतला खड़ा किया गया. इसके बाद जैसे ही भगवान राम की सवारी मंच पर पहुंची, एक ही बाण से रावण का वध किया गया. रामजी की सवारी परम्परा अनुसार रामलीला मैदान से निकलती आ रही विगत तीन वर्ष से राम सवारी के आगे रावण का जुलूस निकाला जा रहा है जिसको लेकर विगत दिवस पुलिस थाना परिसर में आयोजित शान्ति समिति की बैठक में रामलीला मण्डल के सचिव ने कहा था कि राम सवारी के आगे रावण की सवारी नहीं निकाले उसका मार्ग अलग रखा जाय लेकिन वह भी मनमानी व्यवस्था के तहत राम सवारी के आगे रावण का जुलूस निकाला गया जो दशहरा मैदान तक चला.
