विशेषज्ञों ने कहा, “यह कार्रवाई एक व्यापक और चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाती है। हमने भारतीय अधिकारियों को शांतिपूर्ण सभा पर अनुचित प्रतिबंधों, बल के अत्यधिक इस्तेमाल, मनमानी हिरासत, जबरन गुमशुदगी और छात्र कार्यकर्ताओं को निशाना बनाए जाने सहित अन्य मामलों को लेकर बार-बार आगाह किया है।”
उन्होंने कहा कि मार्च में छात्र और श्रमिक अधिकारों के लिए काम करने वाले 10 कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने नयी दिल्ली में हिरासत में लिया था। उन्हें 24 घंटे से अधिक समय तक किसी से संपर्क नहीं करने दिया गया और कथित तौर पर दुर्व्यवहार, धमकी, दबाव तथा जबरन बयान देने के लिए मजबूर किया गया। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें रिहा किया गया।
विशेषज्ञों ने कहा, “प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने के बावजूद कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने कथित तौर पर निहत्थे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया, जिसमें लाठीचार्ज भी शामिल है। हजारों लोगों को प्रदर्शनों में शामिल होने से भी रोका गया।”
रिपोर्टों के अनुसार, हाल में नयी दिल्ली में सात हज़ार से अधिक युवाओं, पत्रकारों, मानवाधिकार रक्षकों, वकीलों और राजनीतिक दलों के सदस्यों को मनमाने ढंग से हिरासत में लेकर दूरस्थ हिरासत केंद्रों में भेजा गया। वहां कथित तौर पर उनके फोन जब्त कर लिए गए और प्रदर्शनों से संबंधित सभी सामग्री मिटा दी गई। प्रदर्शन के नेताओं सहित अधिकांश लोगों को 24 घंटे बाद रिहा कर दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को चोटें आई हैं और कुछ ने दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायत की है। विशेषज्ञों ने प्रदर्शनों और उनसे संबंधित हिरासत के दौरान यौन हिंसा तथा लैंगिक आधार पर दुर्व्यवहार की खबरों पर विशेष चिंता जताई।
विशेषज्ञों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, इस प्रावधान के तहत सार्वजनिक सभाओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाए जाने, सार्वजनिक परिवहन निलंबित करने और इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने की खबरें हैं।
विशेषज्ञों ने कहा, “ये कदम शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सुरक्षा तथा मानवाधिकारों की रक्षा के अधिकार सहित भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्वों का उल्लंघन करते हैं।” उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण सभाओं पर कोई भी प्रतिबंध कानून के अनुरूप होना चाहिए, उसका वैध उद्देश्य होना चाहिए और वह आवश्यक तथा आनुपातिक होना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से बल के अत्यधिक इस्तेमाल को तत्काल रोकने, सभाओं पर लगाए गए व्यापक प्रतिबंध वापस लेने और बायोमेट्रिक प्रणालियों के माध्यम से डिजिटल निगरानी के दुरुपयोग तथा इंटरनेट सेवाओं में बाधा डालने से बचने की अपील की।
