केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने सोमवार को एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के दौरान संयुक्त रूप से इसकी घोषणा की। श्री गोयल ने कहा कि इस समझौते की सफलता इस बात से मापी जाएगी कि यह कितने नए अवसर पैदा करता है और न्यूजीलैंड तथा देश के लोगों के जीवन में क्या सकारात्मक बदलाव लाता है। न्यूजीलैंड के बाजार में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच भारतीय निर्यातकों – विशेष रूप से एमएसएमई, कारीगरों, किसानों और महिला उद्यमियों – के लिए नए और महत्वपूर्ण अवसर खोलती है।
उन्होंने कहा, “हमारे किसानों के लिए यह समझौता नए अवसरों के साथ-साथ उचित सुरक्षा उपाय भी प्रदान करता है। ‘कृषि उत्पादकता साझेदारी’ के तहत सेब, कीवी और शहद के लिए कार्य योजनाएं बनाई गई हैं। इसमें ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना, बागवानी प्रबंधन में सुधार, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और कृषि उत्पादकता को बढ़ाना शामिल है, जिससे पूरे देश में किसानों की आय में वृद्धि होगी।”
इस अवसर पर श्री गोयल ने भारत से न्यूजीलैंड के लिए पहली बार एक जेसीबी मशीन के निर्यात को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
श्री मैक्ले ने कहा, “भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता लागू होना हमारे दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ है। न्यूजीलैंड के निर्यातकों के लिए यह एफटीए 1.4 अरब उपभोक्ताओं और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक के दरवाजे खोलता है। भारत को होने वाले न्यूजीलैंड के मौजूदा निर्यात को शुल्क खत्म होने या उसमें भारी कमी आने से फायदा मिलेगा। साथ ही, भारत का सारा सामान न्यूजीलैंड में बिना किसी शुल्क के जा सकेगा, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और उन्हें न्यूजीलैंड के अन्य एफटीए साझेदारों के बराबर प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलेगा। इस समझौते की सफलता अंततः इस बात से मापी जाएगी कि इससे कितने अवसर पैदा होते हैं और हमारे व्यवसायी इसका कितना लाभ उठाते हैं।”
एफटीए के तहत न्यूजीलैंड ने भारतीय निर्यात से जुड़ी सभी टैरिफ लाइनों पर सीमा शुल्क समाप्त कर दिया है। पहले इन पर 10 प्रतिशत तक शुल्क थे। इससे सिले-सिलाए परिधान, कपड़े, चमड़ा, फुटवियर, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग के सामान, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स, रसायन, दवा, कृषि उत्पाद और परिष्कृत खाद्य पदार्थ जैसे क्षेत्रों को फायदा होने की उम्मीद है। लकड़ी के गट्ठरों, कोकिंग कोल और धातु के स्क्रैप पर शुल्क खत्म होने से विनिर्माण और एमएसएमई आपूर्ति श्रृंखला और मजबूत होगी। दवा और चिकित्सा उपकरण उद्योगों को भी आसान नियामक प्रक्रियाओं से लाभ मिलेगा।
वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि एफटीए का उद्देश्य देशों के बीच एक गहरी आर्थिक साझेदारी बनाना है। इस एफटीए के तहत हमें उम्मीद है कि इससे न्यूजीलैंड से भारत में काफी निवेश आएगा। प्रशांत क्षेत्र की अन्य सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के न्यूजीलैंड के साथ बहुत गहरे व्यापारिक संबंध हैं। यह एफटीए हमें भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार में एक प्रमुख भागीदार बनने का अवसर देता है। अब इस अवसर को भारतीयों के लिए वास्तविक लाभ में बदलने की जरूरत है।
इस समझौते के लिए बातचीत 16 मार्च 2025 को शुरू हुई थी और 22 दिसंबर 2025 को वार्ता पूरी हो गई। इस समझौते पर 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षर किए गए। इसका लक्ष्य साल 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके सात अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर (करीब 35,000 करोड़ रुपये) तक पहुंचाना है।
