नयी दिल्ली, (वार्ता) कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने रविवार को दिल्ली पुलिस और प्रशासन पर अपने नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका से जुड़े मामलों की सुनवाई में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि दोनों नेता तिहाड़ जेल में पांचवें दिन भी बंद हैं और विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एसईएम) के समक्ष सुनवाई के दौरान प्रक्रियागत बाधाएं पैदा की गईं।
सुनवाई के बाद मीडिया से बातचीत में सीजेपी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना के सुनवाई का समय बार-बार बदला गया, जिससे बचाव पक्ष के वकीलों को दोपहर से शाम तक इंतजार करना पड़ा।
उन्होंने दावा किया कि विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट और सरकारी वकील शाम करीब 5.30 बजे पहुंचे, लेकिन सुनवाई के दौरान कथित तौर पर मजिस्ट्रेट को भेजे गए एक धमकी भरे संदेश का मुद्दा उठा दिया गया।
सुश्री सिंह ने कहा, “चार दिनों तक लगातार अनुपस्थित रहने वाले सरकारी वकील आज अचानक पहुंचे और सुनवाई को कथित धमकी भरे संदेश की ओर मोड़ने की कोशिश की।”
उन्होंने आरोप लगाया कि अभियोजन पक्ष इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेजी साक्ष्य या आधिकारिक सत्यापन प्रस्तुत नहीं कर सका। सुश्री सिंह के अनुसार, बचाव पक्ष ने संदेश की प्रामाणिकता स्थापित करने और उसे भेजने वाले की पहचान करने के लिए औपचारिक कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा, “जब हमारी कानूनी टीम ने प्राधिकरण से आधिकारिक आदेश दर्ज करने, संदेश भेजने वाले की पहचान करने और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ उचित कार्रवाई शुरू करने की मांग की, तो मजिस्ट्रेट और सरकारी वकील ने मामले के गुण-दोष के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया और वहां से जाने की तैयारी करने लगे।”
पार्टी ने कहा कि किसी अपुष्ट संदेश से जुड़े आरोप को दास और रांका के मामलों की सुनवाई टालने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। उसने अधिकारियों पर सत्यापन संबंधी मंजूरी रोकने और प्रक्रियागत अड़चनें पैदा करने का आरोप लगाया, जिससे दोनों नेताओं की हिरासत लंबी खिंच रही है।
सीजेपी ने इन घटनाक्रमों को न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने का प्रयास बताते हुए दोनों नेताओं की हिरासत को अनुचित करार दिया। पार्टी ने कहा कि वह इस कार्यवाही को चुनौती देने के लिए उच्चतर न्यायिक मंचों पर कानूनी उपाय अपनाएगी और अपने नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग करेगी।