जबलपुर: कटंगी में वर्ष 2011 में औलिया मस्जिद के पीछे हुई फायरिंग और हत्या के मामले में उन्नीसवें अपर सत्र न्यायाधीश विवेक पटेल ने आठ आरोपितों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर दो आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। घटना में हनीफ उर्फ मंजले की गोली लगने से मौत हुई थी, जबकि सात अन्य लोग घायल हुए थे। अभियोजन के अनुसार, घटना नौ नवंबर, 2011 को शाम करीब सवा चार बजे पंचपुरा स्थित औलिया मस्जिद के पीछे हुई थी। अदालत ने माना कि मृतक हनीफ खान उर्फ हन्नू की लाइसेंसी 12 बोर बंदूक से चली गोली से मृतक की मौत हुई। फोरेंसिक जांच में भी इसकी पुष्टि हुई। अदालत ने आसिफ खान, मकबूल खान, तनवीर खान, शाहनवाज खान, इमरान खान, सिराज खान, यासिर अराफात और उवैश खान को विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य मानते हुए हत्या और बलवे के आरोप में दोषसिद्ध किया।
दो आरोपियों को मिला संदेह का लाभ
अदालत ने साजिद नवाज खान को घटना के समय जबलपुर कलेक्ट्रेट स्थित अपर कलेक्टर न्यायालय में मौजूद होने के साक्ष्यों के आधार पर दोषमुक्त किया। आदेश पत्रिका, वकालतनामा और संबंधित अधिकारी की गवाही से उसका पक्ष पुष्ट हुआ। वहीं, मकसूद खान के संबंध में सगाई के सिलसिले में बल्देवगढ़, टीकमगढ़ में होने और पर्स चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने के साक्ष्य सामने आए।
दोषसिद्ध आठों आरोपियों को हत्या के मामले आजीवन कारावास और चार-चार हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 148 के तहत तीन वर्ष कारावास और एक-एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर संबंधित अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने के आदेश दिए। अभियोजन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक प्रमोद पांडे ने पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता आरके दुबे उपस्थित रहे।
