बागली। अक्टूबर 2007 में बागली सीमा क्षेत्र में एक दुखद घटना के तहत राजपूत समाज के युधिष्ठिर(कालु) डाबी की पुलिस वाहन दुर्घटना में दर्द नाक मौत हो गई उस वक्त उनके बड़े भाई प्रताप डाबी ने डॉक्टरो के मुंह से सुना की संबंधित युवक का गंभीर दुर्घटना के चलते रक्त अधिक बहने के कारण निधन हुआ है। उसी दिन से बड़े भाई प्रताप डाबी ने प्रण लिया कि उनकी जानकारी में जब तक आता रहेगा तब तक रक्त की कमी से कोई भी व्यक्ति समय से पहले नहीं मरेगा और उन्होंने एक मुहिम के तहत दर्जनों युवको सोशल मीडिया के माध्यम से रक्तदान करने के लिए प्रेरित करते हुए ग्रुप बनाया आज उनके ग्रुप के सदस्यों द्वारा रक्तदान की संख्या का आकलन किया जाए तो वह हजारों बार रक्तदान करके लोगों की जिंदगी बचाने में मददगार बने अकेले प्रताप सिंह डाबी ने बीते 19 वर्षों में 55 बार रक्तदान किया है।
रक्तदान करते समय वह धर्म समाज नहीं देखे सिर्फ जरूरत को पूरा करने का कार्य करते हैं प्रताप सिंह डाबी ने हमारे संवाददाता सुनील योगी को बताया कि पांच बार उन्होंने मुस्लिम युवक की जान बचाने के लिए भी रक्तदान किया है। शनिवार को भी बुजुर्ग महिला को रक्त की आवश्यकता पड़ने पर वह रक्तदान करने पहुंच गए जबकि नवरात्रि के उपवास चल रहे हैं। धार्मिक प्रवृत्ति और जटाशंकर महंत केशव दास जी(खाकी) के अनन्य भक्त प्रताप सिंह डाबी बताते हैं, कि उनके रक्तदान करने से किसी की जान बचती है ।तो वह स्वयं को सौभाग्यशाली समझते हैं। उनके भाई की घटना को याद करके दुखी मन से कहते हैं, कि उस वक्त भी समय पर बागली सामुदायिक अस्पताल में रक्त लगाने की व्यवस्था और उचित चिकित्सा हो जाती तो शायद उनका भाई अभी उनके साथ रहता बागली कृषि उपज मंडी में कार्यरत प्रताप सिंह डाबी के इस दान की चर्चा लाभान्वित परिवार के साथ-साथ पूरा नगर करता है।
