रीवा:लोक निर्माण विभाग रीवा में निर्माण कार्यों के आवंटन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं. आरोप है कि जिस सडक़ निर्माण कार्य की परफॉर्मेंस गारंटी अवधि अभी समाप्त भी नहीं हुई थी, उसी के दायरे में आने वाले कार्य के लिए दूसरे ठेकेदार को करीब 65 लाख रुपये का काम बिना पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के दे दिया गया. इस मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली और ठेकेदारों के चयन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
चोरहटा-रतहरा माडल सडक़ के कालेज चौराहे में निर्माण चल रहा है. जिसे लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि लंबे समय से एक ही ठेकेदार पर विभाग मेहरबान है. यदि परफॉर्मेंस गारंटी के दौरान ही उसी कार्यक्षेत्र में नया काम स्वीकृत किया गया है तो इसकी प्रक्रिया और औचित्य की जांच होना जरूरी माना जा रहा है. मामले में विभागीय अधिकारियों के बयान ने भी सवालों को और हवा दे दी है. बताया जा रहा है कि संबंधित कार्यपालन यंत्री की ओर से यह तर्क दिया गया कि ‘रीवा में केके सोहगौरा से अच्छा कोई ठेकेदार नहीं है, इसलिए काम दिया गया.’ यदि वास्तव में बिना प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के केवल ठेकेदार की कार्यक्षमता के आधार पर काम दिया गया है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि विभागीय नियमों के तहत अन्य ठेकेदारों को अवसर क्यों नहीं दिया गया.
सवालों के साथ आरोप के घेरे में विभाग
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 65 लाख रुपये के इस कार्य के लिए टेंडर अथवा निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं? यदि प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ तो किस स्तर से इसकी अनुमति दी गई और इसके पीछे क्या कारण रहे, यह जांच का विषय है. वहीं स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं. आरोप है कि राजनीतिक पहुंच रखने वाले ठेकेदारों को लगातार काम मिलने से अन्य ठेकेदारों के लिए प्रतिस्पर्धा के अवसर सीमित हो रहे हैं. अब देखना यह है कि लोक निर्माण विभाग इस पूरे मामले में कार्य की परफॉर्मेंस गारंटी, तकनीकी स्वीकृति, प्रशासकीय स्वीकृति, वर्क ऑर्डर और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करता है या नहीं. यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की मांग भी उठ सकती है.
