जौरा (मुरैना)। विकासखंड स्रोत समन्वयक (बीआरसीसी) एवं सहायक परियोजना समन्वयक (एपीसी) के पदों पर चयन के लिए जारी पात्र-अपात्र सूची को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। समस्त संबंधित लोकसेवकों ने चयन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और कुछ कर्मचारियों को अनुचित लाभ दिए जाने की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायतकर्ताओं ने परीक्षा जिला स्तर के बजाय भोपाल में आयोजित कराने की मांग भी की है, ताकि चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे।
राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल ने पत्र क्रमांक राशिके/स्था/2026/4969, दिनांक 2 सितंबर 2026 के माध्यम से बीआरसीसी एवं एपीसी पदों की पूर्ति के लिए विज्ञप्ति जारी की थी। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, विज्ञप्ति की कंडिका 2.1 में चार वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके संबंधित पदाधिकारियों की पुनः पदस्थापना के लिए दो वर्ष का कूलिंग पीरियड अनिवार्य होने का प्रावधान है। इसके बावजूद 12 अक्टूबर को जिला शिक्षा केंद्र की ओर से जारी पात्र-अपात्र सूची में जौरा के राजीव जादौन, अंबाह के राम अवतार सिकरवार और पहाड़गढ़ के वीरेंद्र धाकड़ को पात्र श्रेणी में रखे जाने पर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि संबंधित कर्मचारियों ने निर्धारित चार वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है, तो उनकी पात्रता किस आधार पर तय की गई? उन्होंने यह भी मांग की है कि संबंधित कर्मचारियों के पक्ष में यदि कोई न्यायालयीन आदेश है, तो उसकी प्रति और आदेश के आधार पर निर्धारित पात्रता की स्थिति स्पष्ट की जाए।
शिकायत में राजीव जादौन के विरुद्ध पूर्व में हुई विभागीय कार्रवाई और लंबित जांचों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उन्हें पहले दो बार बीआरसीसी पद से हटाया गया था और एक जांच में संबंधित अधिकारियों की टिप्पणियां उनके विरुद्ध थीं। उनका सवाल है कि ऐसी स्थिति में उन्हें पात्र सूची में शामिल करने का आधार क्या है। हालांकि, इन आरोपों और जांच संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
शिकायतकर्ताओं ने कैलारस के पूर्व बीआरसीसी अनिल त्रिवेदी को अपात्र घोषित किए जाने का उदाहरण देते हुए पात्रता निर्धारण में समान मानदंड अपनाने की मांग की है। उनका आरोप है कि सूची तैयार करते समय नियमों की अलग-अलग व्याख्या किए जाने की आशंका है। उच्च पद का प्रभार संभालने वाले कर्मचारियों की पात्रता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
पारदर्शी चयन की मांग
समस्त संबंधित लोकसेवकों ने राज्य शिक्षा केंद्र एवं जिला प्रशासन से पात्र-अपात्र सूची की नियमों के अनुरूप समीक्षा कराने, आपत्तियों का निराकरण करने और चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि परीक्षा भोपाल में आयोजित की जाए, ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात या मिलीभगत की आशंका न रहे। शिकायत के साथ विभागीय विज्ञप्ति, पात्र-अपात्र सूची और संबंधित जांच दस्तावेजों की छायाप्रतियां संलग्न किए जाने का उल्लेख किया गया है।
