बोगोटा, 15 अक्टूबर (वार्ता) कोलंबिया में राष्ट्रपति अबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला के पद संभालने के दो महीने के भीतर ही उनके खिलाफ व्यापक जनआक्रोश देखने को मिला है। राष्ट्रपति की आर्थिक, श्रम और सुरक्षा नीतियों के विरोध में 14 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन के दौरान राजधानी बोगोटा सहित प्रमुख शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।
इस राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का आह्वान मजदूर यूनियनों, शिक्षकों, स्थानीय संगठनों, राजनीतिक आंदोलनों और सामाजिक समूहों ने किया था। वामपंथी नेता एवं पूर्व राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो और विपक्षी सीनेटर इवान सेपेदा भी बोगोटा के ‘प्लाजा दे बोलीवर’ में आयोजित रैली में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में श्रम अधिकार, सार्वजनिक शिक्षा, पेंशन सुधार, न्यूनतम वेतन और स्वदेशी समुदायों के अधिकार शामिल हैं।
सीयूटी ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष फैबियो आरियास ने कहा कि सरकार की जनविरोधी आर्थिक नीतियों और प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई से जुड़े नियमों में बदलाव के विरोध में यह मार्च निकाला गया है। प्रदर्शन की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति डी ला एस्प्रिएला द्वारा जारी ‘अध्यादेश 1525’ विवाद के केंद्र में है। इसमें विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और नाकेबंदी करने वालों के खिलाफ पुलिस को तत्काल कार्रवाई का अधिकार दिया गया है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि यह अध्यादेश सामाजिक विरोध को दबाने के लिए लाया गया है, जबकि राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का सम्मान है, लेकिन हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विरोध प्रदर्शनों के कारण बोगोटा की परिवहन प्रणाली पूरी तरह चरमरा गई, जिससे दो लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए। इसके अलावा विदेश और ऊर्जा नीतियों को लेकर भी सरकार घिरी हुई है। राष्ट्रपति डी ला एस्प्रिएला ने पूर्ववर्ती सरकार के फैसलों को पलटते हुए अमेरिका के साथ संबंध मजबूत किए हैं, इजरायल के साथ मुक्त व्यापार समझौता फिर बहाल किया है और यरूशलम में अपना दूतावास दोबारा खोल दिया है। इसके साथ ही, सरकार के तेल और गैस खोज को फिर से शुरू करने और ‘शेल विखंडन’ पर विचार करने के फैसले से पर्यावरणविद भी नाराज हैं। देश के बढ़ते वित्तीय घाटे को कम करने के लिए सरकार के खर्चों में कटौती और आईएमएफ के साथ बातचीत के प्रस्तावों ने भी जनता के असंतोष को बढ़ाया है।

