जबलपुर: जलवायु परिवर्तन और बढ़ती खेती लागत के बीच धान की ऐसी उन्नत किस्में किसानों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो कम पानी में बेहतर उत्पादन दें और रोगों के प्रति प्रतिरोधी हों। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के आनुवंशिकी एवं पौध प्रजनन विभाग तथा राष्ट्रीय बीज परियोजना प्रक्षेत्र में आयोजित खेत भ्रमण के दौरान अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI), मनीला के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शलभ दीक्षित और जेएनकेवीवी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार सिंह ने किसानों को इन प्रजातियों की जानकारी दी।
वैज्ञानिकों ने जलवायु-सहनशील, रोगरोधी और सीधी बुवाई (डीएसआर) के लिए उपयुक्त धान की किस्मों का प्रदर्शन कराया। उन्होंने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उन्नत बीजों का चयन और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग उत्पादन बढ़ाने में मददगार हो सकता है। भ्रमण के बाद राष्ट्रीय बीज परियोजना सभागार में उन्नत बीज उत्पादन, संवर्धन और किसानों तक उनकी उपलब्धता पर चर्चा हुई। भारत कृषक समाज के जिला उपाध्यक्ष सुभाषचंद्रा ने वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन की सराहना की। किसान सेवा सेना के जितेंद्र देसी, सुरेश कुर्मी, महेंद्र कुर्मी, अंकित पटेल, मुकेश सिंह, मनोज पटेल सहित अनेक किसानों ने सहभागिता की।
