काठमांडू, 14 अक्टूबर (वार्ता) नेपाल के धारचे ग्रामीण नगरपालिका में यारुखोला से दोभान तक के होटलों को अक्टूबर में ट्रैकिंग सीजन शुरू होने के साथ ही पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार किया जा रहा है और कारोबारियों को उम्मीद है कि दशैं के दौरान आने वाले पर्यटकों से उनकी कमाई में सुधार होगा। इससे पहले गत 11 अक्टूबर को बुधीगंडकी नदी में आयी बाढ़ से होटल और घर बह गये हैं। इससे ट्रैकिंग के सफल सत्र की उम्मीदों को झटका लगा है और स्थानीय लोग राहत की मांग कर रहे हैं। इससे सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र धारचे ग्रामीण नगरपालिका का वार्ड नंबर एक रहा। यहां ट्रैकिंग सीजन की तैयारी कर रहे अनेक लोगों को अपने घरों और आजीविका के नुकसान का सामना करना पड़ा।
वार्ड अध्यक्ष राम सिंह गुरुंग ने ‘कांतिपुर’ समाचार पत्र से कहा, “यह ट्रैकिंग सीजन की शुरुआत है। जब पर्यटक आते हैं, तो हमारी अच्छी कमाई होती है।” उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद थी कि इस कमाई से हम दशैं का त्योहार मनायेंगे। इसके बजाय बाढ़ हमारे घर और होटल बहा ले गयी।” श्री गुरुंग के अनुसार, बाढ़ में क्षेत्र के पांच पुल बह गए, जिनमें चार पैदल पुल और एक मोटर वाहन पुल शामिल है। इसके साथ ही ट्रैकिंग पर आने वाले पर्यटकों को सुविधाएं देने वाले अच्छे इंतजामों से लैस लॉज सहित 20 से अधिक होटल भी तबाह हो गये। नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले करीब एक हजार लोग इससे प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा, “नदी के दोनों किनारों को फिर से जोड़ने और ट्रैकिंग मार्ग को दोबारा खोलने के लिए पुलों की जरूरत है। चार स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हो गयी हैं, जिससे उत्तरी गोरखा तक पर्यटकों की पहुंच कट गयी है।”
इस बीच, यारुखोला और दोभान के बीच बाढ़ से 24 घर पूरी तरह नष्ट हो गये, जबकि 15 अन्य मकान क्षतिग्रस्त हो गए। इसके कारण 76 लोग बेघर हो गए और 70 अन्य लोगों पर भी विस्थापित होने का खतरा मंडरा रहा है। श्री गुरुंग ने अपने वार्ड में करीब 10 करोड़ नेपाली रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है।उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों तक पहुंचने वाली खाद्य सामग्री पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, “हम तक बहुत कम राहत सामग्री पहुंची है। चावल की एक बोरी से भी किसी परिवार की तत्काल जरूरतें पूरी नहीं हो पाएंगी।”
गौरतलब है कि चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका का वार्ड नंबर तीन भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वार्ड अध्यक्ष राम कुमार गुरुंग के अनुसार, वहां 23 परिवारों के घर पूरी तरह नष्ट हो गये हैं। उन्होंने कहा कि करीब 200 लोगों को किसी न किसी रूप में सहायता की जरूरत है और सड़कों की मरम्मत करना बेहद जरूरी है। श्री गुरुंग ने कहा, “अलग-अलग क्षेत्रों में बिखरे विस्थापित परिवारों तक राहत पहुंचाई जा रही है। तत्काल प्राथमिकता बाढ़ में बह गयी सड़कों का पुनर्निर्माण करना है।” उन्होंने बताया कि सिरदिबास, जगत, सल्लेरी-पैयूं, यारू, खोरलाबेसी और कालुभीर के आसपास भी सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई यी। इससे प्रभावित वार्डों तक भोजन और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने में कठिनाई हो रही है।
उन्होंने कहा, “बाढ़ ने जगत के प्रमुख बाजार केंद्र टल्लो बगर में होटलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। टल्लो बगर के कुछ होटल बह गए हैं, जिससे पर्यटकों को सेवाएं देने वाले स्थानीय लोगों की कमाई का एक महत्वपूर्ण जरिया खत्म हो गया है।” भीषण बाढ़ से मनास्लु क्षेत्र के ट्रैकिंग मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गये हैं। इसके कारण कुछ पर्यटकों को अपनी यात्रा बीच में छोड़कर लौटना पड़ा है, जबकि अन्य पर्यटक रास्ते में फंसे हुए हैं। चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड नंबर सात के छेकमपार और वार्ड नंबर तीन के जगत में कुछ पर्यटक फंसे हुए हैं। यहां ट्रैकिंग मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण दोनों दिशाओं में आवाजाही बाधित हो गयी है।
मनास्लु संरक्षण क्षेत्र परियोजना (एमसीएपी) के सूचना अधिकारी भुवन ओझा ने बताया कि जगत में पंजीकृत 97 पर्यटकों में से 12 को वापस भेज दिया गया है, जबकि बाकी पर्यटक तीन दिनों से वहां फंसे हुए हैं।
उन्होंने बताया कि चुमनुब्री-6 के लोकपा में फंसे 17 पर्यटक भी लौट चुके हैं। चुम घाटी क्षेत्र में मौजूद 107 विदेशी और 80 नेपाली पर्यटकों में से 19 विदेशी पर्यटकों को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित निकाला गया।
बाढ़ के कारण आरुघाट ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड नंबर तीन और पांच में भी करीब 63 परिवार विस्थापित हो गये हैं। ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष राजू गुरुंग ने बताया कि विस्थापित परिवारों को भूमिथान में ठहराया गया है और राहत सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
उन्होंने कहा, “हमने भूमिथान में 40 विस्थापित परिवारों को अस्थायी रूप से ठहराया है। भोजन सहित पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध है।” धादिंग जिले की त्रिपुरासुंदरी ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड नंबर दो में भी 19 लोग विस्थापित हुए हैं। वार्ड अध्यक्ष कृष्ण बहादुर खत्री के अनुसार, इन लोगों को भोजन या रहने की व्यवस्था को लेकर कोई परेशानी नहीं है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया कि गोरखा और धादिंग के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, अस्थायी आश्रय के लिए सामग्री, कपड़े और स्वच्छता संबंधी जरूरी सामान सहित राहत सामग्री भेजी गयी है।
प्राधिकरण के प्रवक्ता राम बहादुर केसी ने बताया कि खोज, बचाव और राहत अभियान का शुरुआती चरण जारी है। उन्होंने कहा कि स्थिति का आकलन करने के बाद सरकार आगे के कदम उठायेगी।

