दक्षिण प्रायद्वीप में कल से दस्तक देगा पूर्वोत्तर मानसून

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (वार्ता) मौसम विभाग ने बुधवार को कहा कि पूर्वोत्तर मानसून गुरुवार से दक्षिण प्रायद्वीप में दस्तक देगा। देश के शेष हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी और कल से दक्षिण प्रायद्वीप में पूर्वोत्तर मानसून की बारिश शुरू होने के लिए स्थितियां अनुकूल हो रही हैं। इसकी शुरुआत के रूप में चेन्नई और उसके पड़ोसी जिलों में आज तड़के मध्यम बारिश हुई, जबकि तांबरम जैसे कुछ उपनगरीय इलाकों में दोपहर के समय बारिश देखी गई। आने वाले दिनों में चेन्नई और उसके आस-पास के उत्तरी जिलों के अलावा कावेरी डेल्टा, आंतरिक और दक्षिणी जिलों में बारिश होने के आसार हैं।

गौरतलब है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून देश में ‘आने वाला’ मुख्य मानसून है, जो गर्मियों और बरसात के मौसम में बारिश लाता है, जबकि पूर्वोत्तर मानसून वह मानसून है, जो उत्तर-पूर्व दिशा से दक्षिण भारत की तरफ बहता है और मुख्य रूप से सर्दियों के महीनों के आसपास दक्षिण प्रायद्वीप (विशेषकर तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों) में वर्षा करता है। गुरुवार से इसके पांव दक्षिण प्रायद्वीप में कदम रखेंगे।

मौसम विभाग के अनुसार मध्य केरल और आसपास के इलाकों में हवा के निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जबकि दक्षिण श्रीलंका तट से दूर दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर कल हुआ हवा के निम्न दबाव का क्षेत्र अब कोमोरिन क्षेत्र और आसपास के तटों पर फैला हुआ है। पूर्वोत्तर से उठने वाली एक अन्य ट्रफ रेखा ओडिशा तट के पास से गुजर रही है, जो मानसून की बारिश शुरू होने के अनुकूल संकेतों को दर्शाती है।

डेल्टा क्षेत्र के किसान पूर्वोत्तर मानसून की बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। मेट्टूर बांध में पानी का भंडार कम होने के कारण कुर्वाई धान की खेती पहले ही प्रभावित हो चुकी है। यह बांध समय पर 12 जून को नहीं खुल सका था और बाद में एक सितंबर को खोला गया। इसके अलावा पिछले 19 दिनों से कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी में पानी न छोड़े जाने से स्टैनली जलाशय में जलस्तर पिछले कुछ वर्षों में पहली बार 60 फुट से नीचे चला गया है। पानी की कमी से किसान चिंतित हैं क्योंकि उन्होंने सांबा फसल की खेती शुरू कर दी है और अब इस संकट से उबरने के लिए मानसून की बारिश पर उम्मीदें लगाए हुए हैं।गौरतलब है कि सांबा और कुर्रुवा दक्षिण भारत (विशेषकर तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा) में धान की खेती का एक क्षेत्रीय चक्र है, जिसमें कुर्रुवा (जून-जुलाई) दक्षिण-पश्चिम मानसून पर और सांबा (अगस्त) मुख्य रूप से पूर्वोत्तर मानसून पर निर्भर करती है। इसके विपरीत, खरीफ और रबी पूरे देश में लागू होने वाली व्यापक राष्ट्रीय फसल ऋतुएं हैं। सांबा-कुर्रुवा चक्र मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर धान की दो अलग-अलग अवधियों वाली फसलों पर आधारित है, जबकि खरीफ-रबी प्रणाली में देश भर के मौसम के अनुसार अनाज, दलहन और तिलहन की विभिन्न किस्में उगाई जाती हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, नीलगिरि, कोयंबटूर, थेनी और विरुधुनगर जिलों के पश्चिमी घाट क्षेत्रों में एक या दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा मयिलादुथुरई, नागपट्टिनम, तिरुवरुर, तंजावुर, कुड्डालोर, तेनकासी, कन्याकुमारी, कल्लाकुरिची, सलेम, तिरुचिरापल्ली, कांचीपुरम, चेंगलपट्टू, रानीपेट, तिरुपूर, डिंडीगुल जिलों, पुड्डुचेरी और कराईकल में कल भारी बारिश के आसार हैं, जो मानसून की शुरुआत का संकेत देगी।

सोलह अक्टूबर को चेन्नई, कांचीपुरम, तिरुवल्लुर और कुड्डालोर सहित 25 जिलों में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। शेष तमिलनाडु में मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 17 से 20 अक्टूबर तक क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुक कर भारी से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा।
चेन्नई शहर और इसके आसपास के इलाकों के लिए अनुमान जताया गया है कि अगले दो दिनों तक आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में मध्यम बारिश हो सकती है।

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