ब्यावरा: दो दशक से अधिक समय से नियमित रेल संचालन का इंतजार कर रहे लोगों को रामगंजमंडी-भोपाल रेल परियोजना के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। परियोजना भले ही पूर्णता की ओर बढ़ रही हो, लेकिन ट्रेन संचालन की तारीख अब भी तय नहीं है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि लगातार समय सीमा के दावे कर रहे हैं, जबकि मैदानी स्थिति बताती है कि परियोजना के कई महत्वपूर्ण काम अभी बाकी हैं। रेलवे के अधिकारी वर्ष 2026 के अंत तक राजगढ़ तक ट्रेन चलाने की उम्मीद जता चुके हैं, लेकिन अब सिविल निर्माण कार्य मार्च 2027 तक पूरा होने की बात कही जा रही है।
बीते 8 अगस्त को पश्चिम मध्य रेलवे के तत्कालीन महाप्रबंधक दिलीप कुमार सिंह ने राजगढ़ स्टेशन पर निरीक्षण और चर्चा के दौरान नवंबर तक सिविल कार्य पूरे होने की उम्मीद जताई थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि इलेक्ट्रिक सप्लाई के लिए ट्रैक्शन सब-स्टेशन (टीएसएस) का काम अधूरा है। हालांकि, उन्होंने कहा था कि यदि नवंबर तक सिविल कार्य पूरे हो जाते हैं तो 2026 में राजगढ़ तक रेल संचालन शुरू किया जा सकता है। उन्होंने जल्द अच्छी खबर मिलने के संकेत भी दिए थे।
लेकिन अब डिप्टी चीफ इंजीनियर गौरव मिश्रा के अनुसार, नेवज नदी पर बनने वाले रेलवे पुल सहित कुछ अन्य सिविल निर्माण कार्य बाकी हैं। इन्हें मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। ऐसे में वर्ष 2026 के अंत तक ट्रेन संचालन के दावों पर सवाल उठने लगे हैं।
दो दशक में लागत 424 करोड़ से बढ़कर 3050 करोड़
रामगंजमंडी-भोपाल रेल परियोजना की शुरुआत वर्ष 2001 में 424 करोड़ रुपये की लागत से हुई थी। समय के साथ इसकी लागत बढ़कर 3050 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। करीब 276 किलोमीटर लंबी यह परियोजना मध्य प्रदेश और राजस्थान के पांच जिलों भोपाल, सीहोर, राजगढ़, झालावाड़ और कोटा को जोड़ती है। इसके पूरा होने से यात्रियों को सुविधा मिलने के साथ माल परिवहन भी अधिक सुगम हो सकेगा।
परियोजना के तहत कुल 12 रेलवे स्टेशन तैयार हो चुके हैं। राजस्थान की ओर से झालावाड़ जिले में चौमहला और खिलचीपुर सहित अन्य स्टेशनों के निर्माण की स्थिति अलग-अलग चरणों में रही है, जबकि ब्यावरा पहले से मौजूद स्टेशन है। नरसिंहगढ़ और कुरावर स्टेशनों का काम भी लगभग पूरा बताया जा रहा है। नरसिंहगढ़ में पटरियों का काम अंतिम चरण में है। हालांकि, स्टेशन और ट्रैक तैयार होने के बावजूद नियमित ट्रेन संचालन शुरू नहीं हो सका है।
टाइम टेबल जारी हुआ, लेकिन ट्रेन नहीं चली
परियोजना में प्रगति के संकेत तब मिले, जब 5 फरवरी 2026 को पहली मालगाड़ी राजगढ़ स्टेशन पहुंची। इसके बाद ट्रायल ट्रेन भी लाई गई। 18 मार्च 2026 को राजगढ़ तक रेल परिचालन के लिए 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से परीक्षण किए जाने की जानकारी सामने आई। उस समय तीन महीने के भीतर ट्रेन चलाने की उम्मीद जताई गई थी।
मई 2026 में घाटोली से नयापुरा तक ट्रेन संचालन का टाइम टेबल भी जारी किया गया, लेकिन नियमित परिचालन शुरू नहीं हो सका। स्टेशन का प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन नहीं होना, नियमित ट्रेन का नहीं चलना और स्टेशनों पर पूरा स्टाफ तैनात नहीं होना भी परियोजना की प्रगति को लेकर सवाल खड़े करता है।
नेवज नदी का पुल, पथरीली जमीन और गैस पाइपलाइन बनी चुनौती
राजगढ़ और ब्यावरा के बीच रेलवे लाइन को हाईवे पार करते हुए आगे बढ़ना है। इस हिस्से में निर्माण कार्य की धीमी गति बड़ी चुनौती बनी हुई है। यहां पथरीली जमीन और गैस पाइपलाइन के कारण काम प्रभावित हुआ है। पाइपलाइन के डायवर्जन का काम पूरा करने का लक्ष्य अगस्त में रखा गया था, ताकि सितंबर से रेलवे लाइन जोड़ने का काम शुरू किया जा सके।
इसके अलावा नेवज नदी पर रेलवे पुल का निर्माण भी बाकी है। रेलवे के सिविल विभाग के अनुसार, पुल सहित कुछ अन्य निर्माण कार्यों में अभी समय लगेगा। ऐसे में बिजली आपूर्ति और जरूरी निर्माण कार्य पूरे हुए बिना नियमित रेल संचालन शुरू करना संभव नहीं होगा।
कोटा के जाम से मिलेगी राहत, माल परिवहन भी होगा सस्ता
रामगंजमंडी-भोपाल रेल परियोजना शुरू होने से मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच यातायात सुगम होने की उम्मीद है। खासकर कोटा के समीप दरा क्षेत्र में सड़क मार्ग पर लगने वाले जाम से यात्रियों को राहत मिल सकती है। रेल संपर्क बेहतर होने से यात्रियों को वैकल्पिक आवागमन सुविधा मिलेगी।
इसके अलावा झालावाड़ स्थित कालीसिंध ताप विद्युत संयंत्र तक कोयला पहुंचाने में भी रेल परिवहन उपयोगी साबित हो सकता है। मौजूदा मार्ग की तुलना में ब्यावरा-झालावाड़ रेल संपर्क से दूरी करीब 42 किलोमीटर कम होने की जानकारी दी गई है। इससे माल परिवहन की लागत घटने की संभावना है।
एक साल में कई दावे, लेकिन संचालन अब भी दूर
नवंबर 2025: परियोजना की गति बढ़ाने के लिए 800 करोड़ रुपये का बजट मिलने की जानकारी सामने आई।
20 नवंबर 2025: तत्कालीन महाप्रबंधक शोभना बंदोपाध्याय ने पश्चिम मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के सांसदों के साथ बैठक में दिसंबर 2026 तक खिलचीपुर तक ट्रेन संचालन की संभावना जताई।
5 दिसंबर 2025: महाप्रबंधक ने नेवज नदी पर बन रहे रेलवे पुल का निरीक्षण किया और वर्ष 2026 तक काम पूरा होने का दावा किया।
5 फरवरी 2026: पहली मालगाड़ी राजगढ़ स्टेशन पहुंची। इसके बाद ट्रायल ट्रेन भी लाई गई।
18 मार्च 2026: राजगढ़ तक 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से परीक्षण किया गया। तीन महीने में ट्रेन चलने की उम्मीद जताई गई।
मई 2026: घाटोली से नयापुरा तक ट्रेन संचालन का टाइम टेबल जारी हुआ, लेकिन नियमित परिचालन शुरू नहीं हुआ।
8 अगस्त 2026: महाप्रबंधक दिलीप कुमार सिंह ने नवंबर तक सिविल कार्य पूरा होने पर 2026 में राजगढ़ तक ट्रेन संचालन की संभावना जताई। साथ ही इलेक्ट्रिक सप्लाई के लिए टीएसएस का काम अधूरा होने की बात कही।
अक्टूबर 2026: अब रेलवे के सिविल विभाग ने शेष निर्माण कार्य मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद जताई है।
मार्च 2027 तक पूरे होंगे सिविल वर्क
“नेवज नदी पर बनने वाले रेलवे पुल का काम अभी बाकी है। इसके अलावा कुछ अन्य सिविल निर्माण कार्य भी पूरे किए जाने हैं, जिनमें समय लगेगा। इन्हें मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। हमारी कोशिश है कि सभी काम जल्द से जल्द पूरे कर लिए जाएं।
गौरव मिश्रा, डिप्टी चीफ इंजीनियर, कोटा, पश्चिम मध्य रेलवे
