वॉशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईंधन की ऊंची कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से रूस से डीजल आयात करने के हालिया ऐलान पर उनके अपने दल के भीतर ही तीखा विरोध शुरू हो गया है। रविवार को छह अमेरिकी सीनेटरों (चार रिपब्लिकन और दो डेमोक्रेट) के एक प्रभावशाली समूह ने संयुक्त रूप से कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रपति प्रशासन से इस विवादास्पद फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है। सीनेटरों का कहना है कि एक तरफ जहां रूस लगातार यूक्रेन के खिलाफ सैन्य हमले कर रहा है और निर्दोष नागरिकों की जान ले रहा है, ऐसे समय में वाशिंगटन द्वारा मॉस्को से ऊर्जा सौदे करना देश की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के सरासर खिलाफ है।
ट्रंप ने की थी पुतिन से फोन पर डील, अमेरिकी कानून और कांग्रेस की मंजूरी के बिना आयात पर सांसदों ने जताई कड़ी आपत्ति
विवाद तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए यह चौंकाने वाला ऐलान किया कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर एक बड़ी डील की है। इस समझौते के तहत रूस शुरुआती चरण में अमेरिकी और वैश्विक बाजार में 300,000 टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा, जिसे बाद में बढ़ाकर लाखों टन किया जाना है। इस घोषणा के तुरंत बाद सीनेटर सुसान कॉलिन्स, लिसा मुर्कोव्स्की, थॉम टिलिस, जॉन कर्टिस, जीन शाहीन और रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कड़ा ऐतराज जताया। सांसदों ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने हाल ही में रूस से तेल और गैस के आयात पर भारी टैरिफ और स्पष्ट प्रतिबंध लगाने का कानून पास किया था, ताकि युद्धरत रूस की आर्थिक रीढ़ को कमजोर किया जा सके, लेकिन इस डील से उन सभी नियमों का खुला उल्लंघन हुआ है।
ऊर्जा विशेषज्ञों और विपक्षी नेताओं की चेतावनी, घरेलू कीमतों पर नहीं पड़ेगा खास असर बल्कि रूस को मिलेगा प्रतिबंधों से फायदा
दूसरी ओर, ऊर्जा विश्लेषकों का भी मानना है कि इस रूसी डीजल सौदे से अमेरिकी पेट्रोल पंपों पर ईंधन की ऊंची कीमतों में कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि आयातित मात्रा देश की दैनिक खपत के मुकाबले बेहद कम है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑन ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी के विशेषज्ञ रिचर्ड नेफ्यू ने कहा कि इस कदम से रूस और ईरान जैसे देशों को प्रतिबंधों की व्यवस्था से बचने का एक बड़ा मौका मिल जाएगा। जहां प्रशासन का तर्क है कि यह फैसला बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए एक जरूरी आर्थिक संतुलन है, वहीं कांग्रेस के भीतर बढ़ते इस भारी विरोध ने ट्रंप प्रशासन के लिए एक नई राजनीतिक और कानूनी चुनौती खड़ी कर दी है।

