रियाद, (वार्ता) सऊदी अरब के रियाद में किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए एक नए हमले में कई लोग घायल हो गए हैं। यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए हमलों के कुछ ही दिनों बाद शनिवार को हुए इस हमले के कारण सऊदी अरब के अधिकारियों को रियाद हवाई अड्डे पर कामकाज रोकना पड़ा है।
हमले के बाद आज सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने सेवाओं को रोकने की घोषणा की। खबरों के अनुसार इस हमले में दर्जनों लोग घायल हुए हैं।
सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास ने कहा कि उसे किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमलों की जानकारी है और उसने अमेरिकी नागरिकों से एयरपोर्ट और उसके आस-पास के इलाकों से दूर रहने के लिए कहा है। कई पश्चिमी देशों के दूतावासों ने भी अपने नागरिकों को उस जगह से दूर रहने की चेतावनी दी।
कई खाड़ी विमान कंपनियों ने रियाद से आने-जाने वाली उड़ानें रद्द कर दीं, जिनमें कुवैत एयरवेज ने सुरक्षा स्थिति का हवाला दिया। फ्लाइटराडार के फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि आने वाली उड़ानों को डायवर्ट या रद्द किया जा रहा था।
सऊदी अधिकारियों के अनुसार, यह ताज़ा घटना गुरुवार को एयरपोर्ट पर हुए उन दो हमलों के बाद हुई है, जिनमें एक पायलट समेत तीन सऊदी नागरिकों की मौत हो गई थी। ईरान समर्थित हूती आंदोलन ने उन हमलों की ज़िम्मेदारी ली थी।
अधिकारियों के अनुसार, छह और सात अक्टूबर को सऊदी अरब के दो हवाई अड्डों पर हुए हमलों में तीन और लोगों की मौत हो गई। यह ताज़ा संदिग्ध हमला यमन में सऊदी-समर्थित सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ती लड़ाई के दौरान हुआ है; हूती विद्रोही देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं।
हूतियों का कहना है कि सऊदी अरब पर उनके हमले, यमन के गृह युद्ध में सरकारी सेनाओं को सऊदी अरब के समर्थन का बदला हैं।
यमन के लाल सागर तट के रणनीतिक रूप से अहम इलाकों में हूती गुट के हमले के बाद संघर्ष और तेज़ हो गया है। इन इलाकों में बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पास मोखा बंदरगाह भी शामिल है, जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए एक बहुत अहम और संकरा रास्ता है। तब से यमन की सरकार समर्थक सेनाओं ने दावा किया है कि उन्होंने लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) पर कब्ज़ा कर लिया है।
सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 2015 में यमन में दखल दिया था ताकि हूती विद्रोहियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार से देश का नियंत्रण छीनने से रोका जा सके। सालों तक चले हवाई हमलों और ज़मीनी लड़ाई के कारण मानवीय संकट पैदा हो गया जिसमें लाखों लोगों की जान चली गई।
उल्लेखनीय है कि 2022 में हुई अस्थायी युद्ध-विराम संधि जुलाई में टूटने लगी जब हूतियों ने सऊदी अरब के ख़िलाफ़ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की और लाल सागर में हवाई अड्डों, तेल सुविधाओं और टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए।
हूती संगठन ने कहा कि उसका यह अभियान सऊदी अरब की ओर से लंबे समय से जारी नाकेबंदी और सना एयरपोर्ट पर किए गए हवाई हमले के जवाब में था।
