जयपुर, 10 अक्टूबर (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद मन्नालाल रावत ने मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और मतदाता सूची को पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया बताया हैं।
श्री रावत ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि राजस्थान में वर्ष 2018 में कांग्रेस ने ही चुनाव आयोग से 42 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की थी। ऐसे में आज एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाना कांग्रेस के पूर्व के रुख से विरोधाभासी है। मतदाता सूची का शुद्धिकरण किसी राजनीतिक दल को लाभ या हानि पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र मतदाता के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश के नौ राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया संचालित की जा रही है। मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन एवं विश्वसनीय बनाए रखना निर्वाचन आयोग के मुख्य दायित्वों में शामिल है।
उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भी भागीदारी रहती है। बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) के माध्यम से विभिन्न राजनीतिक दल अपने प्रतिनिधि नियुक्त करते हैं, जो इस प्रक्रिया में सहभागी होते हैं। भाजपा के नौ लाख सहित सभी विपक्षी दलों के करीब 46 लाख बीएलए इस प्रक्रिया में शामिल हुए। ऐसे में यदि कांग्रेस इस प्रक्रिया पर सवाल उठाती है, तो उसे यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह अपने ही नियुक्त प्रतिनिधियों की भूमिका और कार्यप्रणाली पर अविश्वास कर रही है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी विषय पर सवाल उठाना राजनीतिक दलों का अधिकार है लेकिन तथ्यों और प्रक्रिया के आधार पर चर्चा करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आये हैं, जिनमें मृत मतदाताओं, एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों और अनुपस्थित मतदाताओं से संबंधित मामले शामिल हैं। करीब 2.89 करोड़ मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाये गये और 1.01 करोड़ डुप्लीकेट प्रविष्टियां बतायी गयी हैं। इन आंकड़ों के संदर्भ में पूरी प्रक्रिया और उसके विभिन्न चरणों को समझना आवश्यक है ताकि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित की जा सके।
