वैशाली, ओमान तट के समीप होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक समुद्री जहाज पर गत 12 सितंबर को हुए भीषण मिसाइल हमले के 28 दिन बाद भी बिहार के वैशाली जिले के सुमित कुमार सिंह का कोई आधिकारिक सुराग नहीं मिल सका है। वैशाली के भगवानपुर थाना क्षेत्र के किरतपुर राजाराम गांव के रहने वाले 35 वर्षीय सुमित पिछले पांच-छह वर्षों से मर्चेंट नेवी के जहाजों पर काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। परिजनों के अनुसार, हमले से महज चार-पांच घंटे पहले सुमित ने घर पर फोन कर बताया था कि उनका जहाज बेहद संवेदनशील इलाके से गुजर रहा है और सुरक्षित निकलने के बाद वे दोबारा बात करेंगे, लेकिन इसके बाद उनका फोन हमेशा के लिए बंद हो गया।
जहाज के 14 में से 13 क्रू मेंबर सुरक्षित निकाले गए, इंजन में फंसे होने की आशंका के बीच शव वापसी में हो रही भारी देरी से नाराजगी
घटना के कुछ दिनों बाद परिजनों को पता चला कि विदेशी कॉमर्शियल तेल टैंकर पर हुए इस मिसाइल हमले के दौरान सवार 14 क्रू मेंबर में से 13 को तो सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन सुमित लापता हो गए। साथ काम करने वाले एक सहयोगी के जरिए परिवार को आशंका जताई गई थी कि सुमित का शव जहाज के इंजन वाले हिस्से में फंसा हुआ है। हालांकि, 25 सितंबर को परिजनों को यह सूचना दी गई कि सुमित का शव बरामद कर पैक कर लिया गया है, लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद भी अब तक शव उनके घर नहीं पहुंच पाया है। परिवार का आरोप है कि ओमान स्थित भारतीय दूतावास से लेकर गृह मंत्रालय तक गुहार लगाने के बावजूद उन्हें कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।
मासूम बच्चों और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल, प्रशासनिक उदासीनता के बीच स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी उठे गंभीर सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद सुमित के घर में कोहराम मचा हुआ है। उनकी पत्नी कोमल सिंह, छह साल की बेटी आराध्या और चार साल के बेटे लव्यान्स को अभी तक यह भी ठीक से अहसास नहीं है कि उनके पिता इस दुनिया में नहीं रहे। परिवार ने जिला प्रशासन और सरकार से गुहार लगाई है कि किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता से पहले उनके बेटे का पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचाया जाए, ताकि वे उसका अंतिम संस्कार कर सकें। परिजनों का कहना है कि इस दुख की घड़ी में स्थानीय स्तर पर किसी भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने उनकी सुधि नहीं ली है, जिससे पूरे इलाके के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

