नई दिल्ली, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और ‘इंडिया’ गठबंधन के शीर्ष नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर देश की चुनावी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए राष्ट्रपति से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने उनकी बातों और ‘वोट चोरी’ के आरोपों का किसी भी तरह खंडन नहीं किया, बल्कि विपक्ष से इस संबंध में पुख्ता सबूत मांगे हैं।
लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश का लगाया गंभीर आरोप, मतपत्र प्रणाली को दोबारा बहाल करने की उठी पुरजोर मांग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ने मिलकर देश के लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली को कमजोर करने की साजिश रची है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि एक के बाद एक कई राज्यों में चुनावों के दौरान धांधली और वोट चोरी की गई है, जिसके पुख्ता प्रमाण समय आने पर राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही, कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने यह भी दोहराया कि चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा फिर से बहाल करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह दोबारा मतपत्र (बैलेट पेपर) की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
विपक्षी एकता का संदेश देते हुए सरकार पर बनाया दबाव, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और अन्य नेताओं ने भी भरी हुंकार
इस प्रतिनिधिमंडल में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, माकपा महासचिव एम.ए. बेबी और विभिन्न दलों के कई वरिष्ठ सांसद शामिल रहे। ममता बनर्जी ने कहा कि पूरा विपक्ष एकजुट है और देश की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। विपक्षी नेताओं ने संसद भवन के केंद्रीय कक्ष से राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालकर ‘लोकतंत्र बचाओ’ का नारा बुलंद किया। राहुल गांधी ने विश्वास जताया कि यदि विपक्ष इसी तरह एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाए रखता है, तो चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को बचाने की इस लड़ाई में बड़ी सफलता हासिल होगी।

