वाशिंगटन, अमेरिका में विदेशी श्रमिकों की भर्ती को लेकर एक बड़ा और सख्त फैसला सामने आया है, जहां ट्रंप प्रशासन ने कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब समेत आठ दिग्गज सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन (PERM) कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि इन बड़ी टेक कंपनियों द्वारा इस व्यवस्था का अत्यधिक और कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किए जाने के कारण स्थानीय अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन कंपनियों से जुड़े स्थायी श्रम प्रमाणन के किसी भी नए आवेदन को अब स्वीकार नहीं किया जाएगा और लंबित आवेदनों पर भी प्रक्रिया रोक दी जाएगी।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट और अन्य कंपनियों पर साधा निशाना, वीजा प्रणाली के दुरुपयोग का लगाया गंभीर आरोप
इस बड़े निलंबन की घोषणा करते हुए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट और अन्य आउटसोर्सिंग कंपनियों पर तीखा हमला बोला। वेंस ने आरोप लगाया कि एक तरफ जहां माइक्रोसॉफ्ट ने वर्ष 2025 में हजारों अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला और यह दावा किया कि उन्हें योग्य स्थानीय कर्मचारी नहीं मिले, वहीं दूसरी तरफ कंपनी ने हजारों एच-1बी वीजा और स्थायी श्रम प्रमाणन के लिए आवेदन किए। उन्होंने इन कंपनियों के कामकाज के तरीके को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह अमेरिकी कर्मचारियों और उनकी जीवनशैली के साथ अन्याय है। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले डेढ़ दशक में इन कंपनियों ने लाखों विदेशी श्रमिकों के लिए आवेदन किए हैं, जिसके चलते अमेरिकी जॉब मार्केट में स्थानीय हितों को भारी नुकसान पहुंचा है।
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