दो दिन से बाघ गायब, 24 कैमरे भी खाली हाथ

सीहोर। शहर के आसपास बाघ की मौजूदगी को लेकर वन विभाग की चिंता बढ़ती जा रही है. पिछले दो दिनों से बाघ की कोई नई लोकेशन नहीं मिली है. हालांकि बाघ की तलाश में वन विभाग ने 24 ट्रैप कैमरे यानी 12 जोड़ी कैमरे अलग-अलग संभावित क्षेत्रों में लगाए हैं, लेकिन अब तक किसी भी कैमरे में बाघ की तस्वीर कैद नहीं हुई है. इसके अलावा ड्रोन से भी सर्चिंग की जा रही है. वन विभाग की चार टीमें लगातार संभावित क्षेत्रों में निगरानी और सर्चिंग में जुटी हैं. वहीं शहर के अलग-अलग हिस्सों में बाघ दिखाई देने के दावों के बीच जगह जगह मिले पगमार्क छोटे होने से वन अमला इसे बाघ का शावक होने की संभावना से भी जोड़कर देख रहा है.

पिछले दिनों गणेश मंदिर, अवधपुरी और शांति विहार कॉलोनी के पीछे रहवासियों ने बाघ दिखाई देने का दावा किया था। सूचना के बाद वन विभाग की टीम ने इन क्षेत्रों में सर्चिंग की. इस दौरान कुछ स्थानों पर पगमार्क भी मिले, लेकिन इनका आकार छोटा था. इसके चलते वन अधिकारियों ने बाघ के साथ उसके शावक की मौजूदगी की संभावना भी जताई. हालांकि इसके बाद से अब तक न तो बाघ दिखाई दिया और न ही उसकी स्पष्ट लोकेशन वन विभाग को मिल सकी है. ट्रैप कैमरों के अलावा ड्रोन से भी संभावित क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है. जिन स्थानों पर बाघ दिखाई देने की सूचना मिली थी या पगमार्क मिले थे, वहां विशेष रूप से सर्चिंग की जा रही है. फिलहाल दो दिन से कोई नई लोकेशन नहीं मिलने के कारण बाघ किस दिशा में गया, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.

बाघ दिखने का दावा करने वालों से भी पूछताछ

वन विभाग ने बाघ देखने का दावा करने वाले रहवासियों से भी जानकारी जुटाई है. अधिकारियों ने उनके बताए स्थान, समय और बाघ की दिशा के संबंध में पूछताछ की. हालांकि पूछताछ और मौके की सर्चिंग के बाद भी बाघ की मौजूदगी को लेकर कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया है. लगातार दो दिन से लोकेशन नहीं मिलने के कारण अब विभाग बाघ देखे जाने के दावों की भी जांच कर रहा है.

सबसे पहले नाले में मिले थे पगमार्क

उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय के आसपास बाघ की मौजूदगी का पहला सुराग मठ वाले हनुमान मंदिर के आगे आम के पेड़ों के पास नाले की गीली मिट्टी में मिले पगमार्क से मिला था. इसके आधार पर आशंका जताई गई थी कि बाघ संग्रामपुर, कौडिय़ा और महोडिय़ा गांवों की ओर गया होगा. इसके अलावा उसके कालापहाड़ की ओर जाने की संभावना भी मानी गई थी. हालांकि खेतों में बाघ के पगमार्क नहीं मिले हैं. वर्तमान में सोयाबीन की फसल पक चुकी है और खेतों की मिट्टी सूखने के कारण वहां पगमार्क मिलना भी मुश्किल है.इसके बाद अवधपुरी, हाउसिंग बोर्ड के पीछे, शांति विहार कॉलोनी के पीछे और पचामा क्षेत्र में बाघ होने की चर्चाएं सामने आईं. एक रेस्टोरेंट संचालक और एक महिला ने भी बाघ देखने का दावा किया था. हालांकि अब तक इन दावों की पुष्टि किसी स्पष्ट फोटो, वीडियो या ट्रैप कैमरे की तस्वीर से नहीं हो सकी है. ऐसे में वन विभाग बाघ की वास्तविक मौजूदगी और उसकी दिशा का पता लगाने के लिए लगातार सर्चिंग में जुटा है.

दूसरे वन क्षेत्रों से बुलवाए हैं नाइटविजन ट्रेप कैमरे

बाघ की तलाश के लिए वन विभाग ने अन्य वन क्षेत्रों से अतिरिक्त ट्रैप कैमरे बुलवाए हैं. 12 कैमरे औबेदुल्लागंज तथा 12 कैमरे रेहटी और वीरपुर डेम क्षेत्र से मंगवाए गए हैं. इन्हें बाघ के संभावित मूवमेंट वाले क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर लगाया गया है. कैमरों की निगरानी के साथ वनकर्मी आसपास के क्षेत्र में लगातार गश्त भी कर रहे हैं. इसके अलावा वन विभाग के अधिकारियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को सावधान रहने की समझाईश भी दी जा रही है.

 

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