मुंबई, 05 अक्टूबर (वार्ता) केपी ग्रुप ने सोमवार को निवेशकों के समक्ष वित्त वर्ष 2031-32 तक के लिए अपने विस्तार की संशोधित योजना प्रस्तुत की जिसके अंतर्गत उसने हरित ऊर्जा क्षेत्र में स्वतंत्र बिजली उत्पादक (आईपीपी) के तौर पर 10 गीगा वाटा (10 हजार मेगावाट) क्षमता, अन्य पक्षों के लिए इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण (ईपीसी) के लिए 10 गीगा वाट क्षमता और 10 गीगावाट क्षमता की एकीकृत बैटरी विनिर्माण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
कंपनी ने एक विज्ञप्ति में बताया कि इसमें सोलर सेल उत्पादन और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) असेंबली दोनों शामिल हैं।अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में केपी ग्रुप की परियोजनाएं गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश तक फैली हैं।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि अगली कुछ तिमाहियों में उसके पोर्टफोलियों में रहित ऊर्जा की क्षमता 10 गीगावाट तक पहुंच सकती है। इस समय समूह का पोर्टफोलियो फिलहाल 9.21 गीगावाट है। इस प्रगति के बाद केपी ग्रुप ने अपने अगले चरण के लिए अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य और केंद्रित रोडमैप तैयार किया है।
कंपनी ने कहा है कि वह उसकी नयी योजना में अलग-अलग कारोबारी क्षेत्रों, ग्रुप के स्वामित्व वाली बिजली परिसंपत्तियां, बाहरी ग्राहकों के लिए निष्पादित की जाने वाली अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं और ग्रुप द्वारा निर्मित किए जाने वाले स्टोरेज सिस्टम तथा बैटरी सेल पर अलग अलग तरीके से ध्यान दिया जाएगा। इस केपी 3.0 के तहत अक्षय ऊर्जा, उभरते अक्षय ऊर्जा अवसरों, अंतरराष्ट्रीय कारोबार, ग्रीन हाइड्रोजन, निवेशक संबंधों और कंपनी संचालन सहित विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक अनुभव रखने वाले पेशेवरों की टीम को नेतृत्व की जिम्मेदारियां दी गयी हैं।
यह टीम ग्रुप के कारोबार के विस्तार के साथ इंजीनियरिंग और विनिर्माण से जुड़ी कार्यान्वयन क्षमता को भी मजबूत करेगी। समूह सनड्राप्स एनर्जिया बैटरी स्टोरेज प्लेटफॉर्म के लिए समर्पित कर रहा है। इसके दायरे में बीईएसएस आईपीपी, ग्रुप कैप्टिव, सी एंड आई परियोजनाएं, बैटरी असेंबली और सेल विनिर्माण शामिल हैं। ग्रुप फ्लोटिंग सोलर के लिए एक समर्पित प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है। इसमें गुजरात की 110 मेवा एसी/142 मेवा डीसी क्षमता वाली कडाणा डैम परियोजना भी शामिल है। कंपनी अब वह पावर एक्सचेंज और द्विपक्षीय बिजली बाजारों में अपनी क्षमताएं विकसित कर रहा है। इसके लिए उसे लाइसेंस मिल चुका है। गुजरात के मातर स्थित संयंत्र में समूह का एक मेगावाट क्षमता का इलेक्ट्रोलिसिस आधारित ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र चल रहा है।
समूह विदेशों में बोत्सवाना, जाम्बिया और तंजानिया तथा सऊदी अरब में अवसर तलाश रहा है। बोत्सवाना में ग्रुप पांच गीगावाट अक्षय ऊर्जा और संबंधित बुनियादी ढांचा परियोजना पर काम कर रहा है। इसका शुरुआती चरण 500 मेगावाट
