
प्रवेश कुमार मिश्र
नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपने आठ उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर न सिर्फ अनुभवी संगठनकर्ताओं को सम्मान देते हुए जमीनी सामाजिक व जातीय संतुलन को साधने का प्रयास किया है बल्कि क्षेत्रीय समीकरणों को साधकर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राजनीति का एक व्यापक खाका खींच दिया है.
जानकार बता रहे हैं कि भाजपाई रणनीतिकारों ने उम्मीदवारों के चयन में जातियों के गणित, लिंग भेद के संतुलन, क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और संगठनात्मक अनुशासन का जिस तरह से सामंजस्य बैठाने का प्रयास किया है उससे साफ है कि यह प्रयास खास तौर से सपा का पीडीए पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक या कांग्रेस का पीडीए पंडित, दलित अल्पसंख्यक एजेंडे की सीधी काट है.
चर्चा है कि वर्तमान केंद्रीय मंत्रियों हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को दोबारा उम्मीदवार न बनाकर शीर्ष नेतृत्व ने यह साफ संदेश दिया है कि आने वाले समय में संगठन और क्षेत्रीय समीकरणों को अधिक धार दी जाएगी. कहा जा रहा है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में मिले आंशिक झटकों से सबक लेते हुए भाजपा ने राज्यसभा के टिकट वितरण में तीन अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी चेहरों, दो अनुसूचित जाति यानी दलित चेहरों और तीन सवर्ण जिसमें दो ब्राह्मण और एक ठाकुर चेहरों को शामिल कर एक झटके में विभिन्न समीकरणों को साध दिया गया है. जहां एक तरफ ब्राह्मण प्रतिनिधित्व के रूप में राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय को आगे लाकर पार्टी ने अपने पारंपरिक उच्च जाति वोटबैंक को जोड़े रखने का प्रयास किया है, तो वहीं विद्यासागर सोनकर और पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत जैसे दलित चेहरों के माध्यम से वंचित वर्गों में पैठ मजबूत करने की रणनीति अपनाई है. इस घोषणा का एक खास पहलू आधी आबादी यानी महिलाओं को दिया गया प्रतिनिधित्व है. प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार के रूप में दो महिला चेहरों को उच्च सदन का रास्ता दिखाकर पार्टी ने महिला सशक्तिकरण और साइलेंट वोटर माने जाने वाले महिला वर्ग को अपने पाले में बनाए रखने का मजबूत राजनीतिक संदेश दिया है.
जहां तक क्षेत्रीय समीकरणों के नजरिए से इस निर्णय को देखें तो यह स्पष्ट है कि भाजपाई रणनीतिकारों ने पूरे उत्तर प्रदेश को भौगोलिक रूप से संतुलित करने का प्रयास किया है. रुहेलखंड जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र से धर्मपाल सिंह लोधी और पूर्व सांसद संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाकर पश्चिम और मध्य उत्तर प्रदेश के साथ-साथ लोधी और कुर्मी जैसी मजबूत गैर-यादव ओबीसी जातियों को एक साथ साधा गया है. इसी प्रकार इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा के रूप में पूर्वांचल को साधने का प्रयास किया गया है.
सूत्रों की मानें तो प्रदेश की ओर से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा के साथ-साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, प्रख्यात हिन्दी कवि कुमार विश्वास तथा कन्नौज के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक, देवरिया के वरिष्ठ नेता रमापति राम त्रिपाठी और हरीश द्विवेदी जैसे कद्दावर संगठनकर्ताओं का नाम केन्द्रीय नेतृत्व को भेजा गया था लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उन नेताओं को पुरस्कृत किया है जिन्होंने चुनावी मौसम के इतर भी ज़मीनी स्तर पर संगठन को जोड़ने का काम किया है. कहा जा रहा है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा को आगे लाना भी इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए बौद्धिक और कानूनी बिरादरी को सीधा संदेश दिया गया है. इतना ही नहीं यह सूची उत्तर प्रदेश भाजपा के भीतर एक बड़े पीढ़ीगत और नीतिगत बदलाव का संदेश है.
