
अनूपपुर, जिले में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के गायब होने को लेकर बनी स्थिति अब स्पष्ट हो गई है। जिन ईवीएम मशीनों का रिकॉर्ड मिलान के दौरान पता नहीं चल पा रहा था, वे वास्तव में निर्वाचन कार्यालय भोपाल भेजी गई थीं। संबंधित पुराना पत्र मिलने के बाद पूरा मामला स्पष्ट हुआ है, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
जानकारी के अनुसार, निर्वाचन प्रक्रिया के बाद ईवीएम की काउंटिंग और रिकॉर्ड मिलान के दौरान कुछ मशीनों का सही ढंग से मिलान नहीं हो पाया था। रिकॉर्ड में मशीनें उपलब्ध नहीं मिलने के बाद उनके गुम होने की आशंका सामने आई थी। मामला गंभीर होने के कारण अनूपपुर कोतवाली में एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।
इसके बाद निर्वाचन संबंधी पुराने अभिलेखों की जांच की गई। जांच के दौरान वह पुराना पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें संबंधित ईवीएम मशीनों को निर्वाचन कार्यालय भोपाल भेजे जाने का उल्लेख था। पत्र मिलने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि जिन मशीनों के गुम होने की बात सामने आई थी, वे कहीं गायब नहीं हुई थीं, बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत भोपाल भेजी गई थीं।
मामले के स्पष्ट होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने निर्वाचन जैसे संवेदनशील कार्य में ईवीएम के रिकॉर्ड संधारण, काउंटिंग के बाद मिलान तथा मशीनों के आवागमन की निगरानी को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं।
समय पर रिकॉर्ड का सही मिलान नहीं होने के कारण जहां ईवीएम के गुम होने की स्थिति बनी, वहीं मामला पुलिस तक पहुंच गया और एफआईआर दर्ज कराने की नौबत आई। अब पुराने पत्र के सामने आने के बाद संबंधित अभिलेखों का मिलान कर पूरे रिकॉर्ड को दुरुस्त किए जाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
पुराना पत्र बना मामले की गुत्थी सुलझाने की अहम कड़ी
निर्वाचन कार्यालय भोपाल को ईवीएम भेजे जाने संबंधी पुराने पत्र के मिलने को पूरे मामले में अहम कड़ी माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि रिकॉर्ड में जिन मशीनों की उपलब्धता नहीं मिल रही थी, उनका निर्वाचन कार्यालय भोपाल भेजे जाने का दस्तावेजी उल्लेख मौजूद था ।
