नई दिल्ली, कभी भारी वित्तीय संकट और बढ़ते कर्ज के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी देश की सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने एक ऐतिहासिक वापसी की है। फ्रांसीसी नेटवर्क टेस्टिंग फर्म ‘nPerf’ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, BSNL ने वित्त वर्ष 2026 में फिक्स्ड-लाइन ब्रॉडबैंड सेवाओं के प्रदर्शन में देश की सभी निजी कंपनियों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा जुलाई 2022 में मंजूर किए गए 1.64 लाख करोड़ रुपये के विशाल रिवाइवल पैकेज और भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (BBNL) के साथ हुए विलय ने कंपनी को यह नया जीवनदान दिया है, जिससे इसके बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व सुधार आया है।
डाउनलोड और अपलोड स्पीड में जबरदस्त उछाल, लेटेसी और यूट्यूब स्ट्रीमिंग के मामले में भी प्राइवेट दिग्गजों से आगे
टेलीकॉम बाजार में कभी एयरटेल और जियो जैसी निजी कंपनियों के आगे संघर्ष कर रही BSNL ने अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करते हुए शानदार आंकड़े दर्ज किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, BSNL ने फिक्स्ड ब्रॉडबैंड में 89,174 nPoints स्कोर कर एयरटेल (74,975) और जियो (73,957) को पीछे छोड़ दिया है। कंपनी ने अपनी डाउनलोड स्पीड में साल-दर-साल 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए इसे 78.5 Mbps तक पहुंचाया है, जबकि अपलोड स्पीड, वेब ब्राउजिंग, लेटेसी और यूट्यूब वीडियो स्ट्रीमिंग अनुभव के मामले में भी यह इंडस्ट्री में सबसे आगे बनी हुई है। वर्तमान में BSNL के पास देश का करीब 15.45 प्रतिशत ब्रॉडबैंड मार्केट शेयर है।
ब्रिटिश काल के टेलीग्राफ इतिहास से लेकर आधुनिक डिजिटल युग तक का सफर, कभी बंद होने वाली सर्विस बनी ग्राहकों की पसंद
गौरतलब है कि BSNL की जड़ें 1851 की ईस्ट इंडिया कंपनी के टेलीग्राफ नेटवर्क से जुड़ी हैं, और साल 2000 में आधिकारिक गठन के बाद इसने देश के हर कोने में कनेक्टिविटी पहुंचाई थी। हालांकि, विपणन की कमी और भारी कर्ज (लगभग 20,000 करोड़ रुपये) के चलते इसकी ऐतिहासिक टेलीग्राम सर्विस जुलाई 2015 में बंद करनी पड़ी थी। लेकिन BBNL के 5.67 लाख किलोमीटर लंबे ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के नियंत्रण और आक्रामक सुधारों के बाद अब BSNL एक बार फिर शहरी और ग्रामीण भारत में हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभर कर सामने आया है।

