इंदौर: शहर के पश्चिमी क्षेत्र में पानी का मुख्य जल स्रोत यशवंत सागर जलकुंभी से ढका हुआ है. जलकुंभी के कारण तालाब में पानी बहुत कम दिखाई दे रहा है और कैचमेंट एरिया जलकुंभी से आच्छादित है. खास बात यह है कि इस साल बारिश कम होने से यशवंत सागर अपनी पूरी क्षमता से भी नहीं भराया है। गर्मी तक पानी की पूर्ति होना असंभव है.
शहर के प्रमुख तालाबों में नगर निगम द्वारा इस बार बारिश के पहले सफाई अभियान नहीं चलाया गया. इसका परिणाम है कि शहर को नर्मदा के अलावा सबसे बड़े पानी प्रदाय करने वाले स्रोत यशवंत सागर जलकुंभी से पट गया है. स्थित यह है कि तालाब के 750 एकड़ में फैले कैचमेंट इलाके में जलकुंभी ही जलकुंभी नजर आ रही है. तालाब के पानी में 70 प्रतिशत जलकुंभी फैल चुकी है. यशवंत सागर तालाब की जलभराव क्षमता कुल 19 फीट है. इस साल मानसून की बिदाई लगभग हो चुकी है. बारिश कम होने से तालाब पूरी क्षमता से नहीं भर पाया है. इस साल एक बार भी ओवरफ्लो नहीं हुआ.
यशवंत सागर ओवरफ्लो नहीं होने से साइफन भी नहीं चल सके. आज की स्थिति में यशवंत सागर तालाब अपनी क्षमता से तीन फीट कम यानि 16 फीट पानी ही है. तालाब में कम पानी होने के साथ जलकुंभी से पानी प्रदूषित हो रहा है. तालाब से ग्रामीण सीधा पानी उपयोग में लेते है, जिससे बीमारियां फैलने की आशंका है. जलकुंभी होने के कारण पानी की शुद्धता प्रभावित होती है. नगर निगम ने समय पर जलकुंभी हटाने का कार्य नहीं किया, तो बचे 30 प्रतिशत तालाब के पानी में भी जलकुंभी फैल जाएगी. परिणाम स्वरूप आने समय में पश्चिम क्षेत्र पानी के लिए हाहाकार करेगा.
पानी की शुद्धता होती है प्रभावित
नर्मदा विभाग के पूर्व मुख्य इंजीनियर मुकेश चौहान ने कहा कि जलकुंभी सीधे पानी का उपयोग करने वालों के लिए नुकसानदायक है. यशवंत सागर में जलकुंभी है तो तुरंत हटाना चाहिए, क्योंकि जलकुंभी के कारण सूर्य किरणें सीधे पानी में नहीं जाती है, जिससे पानी की शुद्धता प्रभावित होती है.
कहते है प्रभारी अधिकारी…
नगर निगम अपर आयुक्त आशीष कुमार पाठक ने कहा कि इस साल पानी कम गिरा है और साइफन नहीं खुले हैं. कैचमेंट एरिया में नालों के पानी में बहकर तालाब में आ गई है. पानी कम गिरने से ओवरफ्लो में बाहर हो जाती है, इस बार नहीं हुई. तालाब से जलकुंभी हटाने के दूसरे विकल्प पर विचार कर रहे हैं.
