नयी दिल्ली, 28 सितंबर (वार्ता) आयुष मंत्रालय ने कहा कि 24 सप्ताह तक मानकीकृत अश्वगंधा मूल अर्क के दैनिक सेवन से लिवर या किडनी को नुकसान होने का कोई प्रमाण नहीं मिला।
आयुष मंत्रालय ने आज बताया कि 1200 स्वस्थ वयस्कों पर किये गये एक बहु-केंद्रित, रैंडमाइज्ड, डबल-ब्लाइंड और प्लेसीबो-नियंत्रित क्लिनिकल अध्ययन में पाया गया है कि 24 सप्ताह तक मानकीकृत अश्वगंधा मूल अर्क के दैनिक सेवन से लिवर या किडनी को नुकसान होने का कोई प्रमाण नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि 20 अगस्त को फ्रंटियर्स इन मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन में 18 से 70 वर्ष की आयु के उन स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया, जिन्हें कोविडशील्ड वैक्सीन की पहली, दूसरी या बूस्टर खुराक मिल चुकी थी। प्रतिभागियों को प्रतिदिन 500 मिलीग्राम मानकीकृत जलीय अश्वगंधा मूल अर्क या समान प्लेसीबो दिया गया। अध्ययन सात केंद्रों पर किया गया और इसमें क्लिनिकल, प्रयोगशाला तथा इम्यूनोलॉजिकल आकलन किये गये। कुल 1,200 प्रतिभागियों में से 1,032 यानी 86 प्रतिशत ने अध्ययन पूरा किया।
अध्ययन के दौरान लिवर और किडनी के कार्य से जुड़े मानक परीक्षणों के परिणाम संदर्भ सीमाओं के भीतर रहे। लीवर एंजाइम, बिलीरुबिन, क्रिएटिनिन और ब्लड यूरिया समेत विभिन्न जांचों में अश्वगंधा के सेवन से संबंधित लिवर या किडनी की क्षति का कोई प्रमाण नहीं मिला। अध्ययन में किसी गंभीर प्रतिकूल घटना को दिये गये हस्तक्षेप से संबंधित नहीं पाया गया और प्रतिकूल घटना के कारण किसी प्रतिभागी ने अध्ययन से नाम वापस नहीं लिया।
यह अध्ययन नौ संस्थानों के 45 शोधकर्ताओं की बहु-विषयक टीम ने किया। इसमें केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद , अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर, आयुष सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, सेंटर फॉर कॉम्प्लीमेंटरी एंड इंटीग्रेटिव हेल्थ और सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय समेत अन्य संस्थान शामिल थे।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि अध्ययन के निष्कर्ष मानकीकृत आयुर्वेदिक हस्तक्षेपों की सुरक्षा और उचित उपयोग से जुड़े वैज्ञानिक साक्ष्यों को मजबूत करते हैं। अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. अरविंद चोपड़ा ने कहा कि बड़े और बहु-केंद्रित रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल से 24 सप्ताह तक मानकीकृत अश्वगंधा की सुरक्षा और सहनशीलता से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं।
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