
सीधी। दिव्यांग बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की दिशा में जिले में पांचों विकासखंडों में आयोजित मूल्यांकन एवं चिकित्सीय परीक्षण शिविरों में 293 बच्चों को विभिन्न सहायक उपकरणों के लिए चिन्हित किया गया है। इन बच्चों के लिए 521 सहायक उपकरण प्रस्तावित किए गए हैं जिनकी अनुमानित लागत 27 लाख 75 हजार 348 रुपये आंकी गई है। वहीं चिकित्सीय परीक्षण के बाद 108 बच्चों के नवीन दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनाए गए हैं।
राज्य शिक्षा केन्द्र के निर्देशानुसार कलेक्टर विकास मिश्रा के निर्देशन एवं जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केन्द्र विनय मिश्र के मार्गदर्शन में 19 से 24 सितंबर तक जिले के मझौली, कुसमी, रामपुर नैकिन, सिहावल एवं सीधी विकासखंड में शिविर आयोजित किए गए। शिविरों में भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम के विशेषज्ञों द्वारा बच्चों की दिव्यांगता के प्रकार एवं व्यक्तिगत आवश्यकता के आधार पर मूल्यांकन किया गया। इसके साथ ही जिला चिकित्सा मंडल द्वारा बच्चों का चिकित्सीय परीक्षण किया गया तथा आवश्यकतानुसार नवीन दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी किए गए। मूल्यांकन के दौरान बच्चों के लिए तिपहिया साइकिल, व्हीलचेयर, कैलिपर, श्रवण यंत्र, बैसाखी, वॉकर, चलने की छड़ी, बैटरी, पहिएदार सहायक यंत्र, शिक्षण-अधिगम सामग्री किट, ब्रेल किट, कोहनी वाली बैसाखी, सुगम्य छड़ी, ब्रेल छड़ी, सीपी चेयर एवं सर्वाइकल कॉलर सहित विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरणों का चिन्हांकन किया गया।
शिविरों का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों की आवश्यकता का विशेषज्ञ एवं चिकित्सीय मूल्यांकन कर उन्हें उपयुक्त सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है, ताकि उन्हें शिक्षा, दैनिक जीवन, आवागमन एवं आत्मनिर्भरता में आवश्यक सहयोग मिल सके। नवीन दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनने से बच्चों को शासन की विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं से जोडऩे में भी सुविधा होगी। शिविरों के सफल आयोजन में भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम के विशेषज्ञों, जिला चिकित्सा मंडल के सदस्यों, विकासखंड स्रोत समन्वयकों, समावेशी शिक्षा से जुड़े शिक्षकों, संबंधित शिक्षकों, अभिभावकों तथा विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सहायक परियोजना समन्वयक समावेशी शिक्षा रजनीश श्रीवास्तव की भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता रही।
सीधी विकासखंड से सर्वाधिक बच्चे चिन्हित
विकासखंडवार आंकड़ों के अनुसार मझौली में 143 बच्चों की उपस्थिति रही, जिनमें 60 बच्चों को 104 उपकरणों के लिए चिन्हित किया गया तथा 18 नवीन दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनाए गए। कुसमी में 112 बच्चों की उपस्थिति में 22 बच्चों को 41 उपकरणों के लिए चिन्हित किया गया और 13 प्रमाण-पत्र बनाए गए। रामपुर नैकिन में 129 बच्चों की उपस्थिति रही। यहां 46 बच्चों को 76 उपकरणों के लिए चिन्हित किया गया तथा 21 नवीन प्रमाण-पत्र बनाए गए। सिहावल में 134 बच्चों की उपस्थिति रही, जिनमें 43 बच्चों को 79 उपकरणों के लिए चिन्हित किया गया तथा 30 नवीन प्रमाण-पत्र बनाए गए। सीधी विकासखंड में सर्वाधिक 190 बच्चों की उपस्थिति रही। इनमें 122 बच्चों को 221 सहायक उपकरणों के लिए चिन्हित किया गया तथा 26 नवीन दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनाए गए।
