भोपाल। मध्य प्रदेश में अतिथि विद्वानों का आंदोलन अब राजनीतिक दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है। फॉलन आउट प्रक्रिया को खत्म करने की मांग को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से हुई बातचीत के बाद अतिथि विद्वानों ने ‘विद्वान जनता पार्टी’ (VJP) के गठन का ऐलान किया है।
अतिथि विद्वानों का कहना है कि कॉलेजों में नियमित प्रोफेसर की नियुक्ति होने पर पहले से काम कर रहे अतिथि विद्वानों को हटाने की व्यवस्था यानी फॉलन आउट प्रक्रिया को समाप्त किया जाना चाहिए। संगठन के प्रतिनिधियों के मुताबिक, मंत्री के साथ हुई बातचीत से कोई समाधान नहीं निकल सका, जिसके बाद राजनीतिक विकल्प के तौर पर पार्टी बनाने का फैसला लिया गया।
*क्या है पार्टी का एजेंडा?*
विद्वान जनता पार्टी ने अतिथि विद्वानों के साथ-साथ वर्ग-1, 2 और 3 के अतिथि शिक्षकों, संविदा कर्मचारियों तथा आउटसोर्सिंग और ठेका कर्मचारियों के स्थायित्व और नियमितीकरण को प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है।
पार्टी ने राजनीति में शिक्षित युवाओं और आम शिक्षित वर्ग की भागीदारी बढ़ाने की बात भी कही है। इसके अलावा बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और वीआईपी संस्कृति जैसे मुद्दों को अपने एजेंडे में रखा है।
पार्टी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इसका उद्देश्य केवल राजनीति करना नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक मंच पर उठाना है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर डॉ. आर.के. सिंह का नाम सामने आया है।
3 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम
अतिथि विद्वानों ने सरकार को 3 अक्टूबर तक ठोस कदम उठाने का समय दिया है। उनका कहना है कि मांगों पर उचित निर्णय नहीं हुआ तो इसके बाद राजधानी में बड़े स्तर पर प्रदर्शन और चक्काजाम किया जाएगा।
अतिथि विद्वानों ने जरूरत पड़ने पर चुनाव मैदान में उतरने के संकेत भी दिए हैं। हालांकि, पार्टी की चुनावी रणनीति और कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारे जाएंगे, इसे लेकर आगे की घोषणा महत्वपूर्ण होगी।
