
ग्वालियर। “ज्ञान अमूर्त होता है और समझ का अर्थ है जो आप जानते हैं। कानून को लागू करने के लिये ज्ञान और समझ दोनो जरूरी हैं क्योंकि कानून का दायरा बहुत व्यापक है। न्यायिक शिक्षा का वास्तविक दायरा पाठ्यक्रम की सीमा नहीं है, और यह लगातार बढ़ती रहना चाहिये।” उक्त विचार देश के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री प्रशांत कुमार मिश्रा ने “न्यायिक शिक्षा के क्षितिज का विस्तार” विषय पर आज कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉफ्रेंस के उद्घाटन समारोह में व्यक्त किये। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के संयुक्त तत्वाधान में किया गया है जिसमें उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्तिगण एवं मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति श्री अल्पेश यशवंत कोगजे सहित मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान एवं महाराष्ट्र राज्य के न्यायमूर्तिगण सम्मिलित हुये।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुये उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने कहा कि इस देश की न्यायिक अकादमियां वे हाथ हैं जो मानव संसाधन रूपी दीपक यानि न्यायपालिका में लगातार ज्ञान का तेल भरते रहे, जिससे न्यायपालिका काम करती है। न्यायिक शिक्षा के तीन दायरे ज्ञान, संवदनशीलता एवं शिक्षार्थी का दायरा एक साथ बढ रहे हैं। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सतीश चंद्र शर्मा ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुये न्यायाधीशों की न्यायिक सोच को लगातार बेहतर करते हुये उनके दायरों के विस्तार करने हेतु जोर दिया। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा ने कहा कि आधुनिक न्यायिक शिक्षा केवल नजीरों की दक्षता तक सीमित नहीं है अपितु यह विधियों का निर्वचन करने की त्वरित योग्यता को भी समाहित करती हैं. इसलिये वर्तमान में न्यायाधीशों को प्रशिक्षित करने हेतु यांत्रिक प्रशिक्षण से बहुविषयक प्रशिक्षण की ओर बढना होगा।
भारत के उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के निदेशक न्यायमूर्ति श्री अनिरूद्ध बोस द्वारा बताया गया कि पिछले 24 वर्षों में अकादमी ने लगभग 52 हजार न्यायाधीशों के साथ संवाद किया है तथा 11 देशों के न्यायाधीशों हेतु कई कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं। श्री बोस ने इस संबंध में कई महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुये विशेष विषय जैसे डीएनए प्रतिवेदन तथा अन्य इलेक्ट्रोनिक अभिलेख के विषय में न्यायाधीशों को प्रशिक्षित करने हेतु उन्मुखीकरण सत्र के आयोजन हेतु सुझाव दिये।
तत्पश्चात मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री अल्पेश यशवंत कोगजे ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कहा कि विधि के क्षेत्र में कौशल प्राकृतिक रूप से नहीं आता है, अपितु इसे समावेशित करना पड़ता है। न्यायिक अकादमी उच्च मानक की न्यायिक शिक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य न्यायाधीशों में दूरदर्शी दृष्टि का सृजन करना है। नेल्सन मंडेला का प्रसिद्ध कथन शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है. जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिये कर सकते हैं। यह हमारे सम्मेलन के विषय के महत्व को स्पष्ट करने के लिये पर्याप्त है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री विवेक अग्रवाल द्वारा भी इस आयोजन के महत्व को रेखांकित कर महत्वपूर्ण विचार साझा किये गये।
*ग्वालियर में इस स्तर का कार्यक्रम पहली बार*
राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी भारत के उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के साथ साथ जिला न्यायालयों के न्यायाधीशगण हेतु प्रशिक्षण, संवाद एवं इसी प्रकार के अन्य कार्यक्रमों का आयोजन करती रहती है, जिससे न्यायदान की प्रक्रिया का समय समय पर उन्नयन होता रहता है। ग्वालियर में इस स्तर का कार्यक्रम पहली बार आयोजित हुआ है जिससे न केवल मध्यप्रदेश के अपितु भारतीय पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों की न्यायपालिका के न्यायाधीशों के ज्ञान में अभिवृद्धि होगी। इस कॉफ्रेंस में वक्ताओं द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी की न्यायदान की प्रक्रिया में उपयोगिता पर विशेष रूप से जोर दिया गया है।
*इनकी रही सक्रिय भागीदारी*
उद्घाटन समारोह के अवसर पर उक्त वक्ताओं सहित मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधिपति न्यायमूर्ति श्री विवेक रूसिया, न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक, न्यायमूर्ति श्री विवेक अग्रवाल, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति न्यायमूर्ति श्री जी. एस. आहलूवालिया एवं उच्च न्यायालयों के अन्य न्यायमूर्तिगण, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह, मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के डायरेक्टर श्री उमेश पांडव, जिला न्यायालयों के न्यायाधीशगण, उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष व सचिव, अतिरिक्त महाधिवक्तागण व डिप्टी सॉलीसीटर जनरल, सीनियर एडवोकेट्स सहित अन्य अधिवक्तागण तथा प्रशासनिक अधिकारीगण सम्मिलित हुये।
