इंदौर में निकला झांकियों का कारवां, खजराना गणेश की झांकी से हुआ आगाज

इंदौर। शहर की ऐतिहासिक झांकी परंपरा का शुक्रवार शाम विधिवत आगाज हुआ। शाम ठीक 6 बजे कलेक्टर ने खजराना गणेश सिद्धिविनायक की झांकी का पूजन कर झांकियों के कारवां को रवाना किया। इस दौरान नगर निगम कमिश्नर, स्मार्ट सिटी सीईओ, अपर कलेक्टर सहित जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे।

झांकी कारवां में सबसे आगे खजराना गणेश की झांकी रही। इसके पीछे इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए), नगर निगम, होप टेक्सटाइल मिल और मालवा मिल की झांकियां क्रम से आगे बढ़ीं। आकर्षक रोशनी से सजी झांकियों के साथ शहर के विभिन्न अखाड़े भी कारवां में शामिल रहे।

6:30 बजे के बाद धीमा पड़ा कारवां

शाम करीब 6:30 बजे झांकियों का कारवां श्रम शिविर चौराहे के आसपास पहुंचा। इसके बाद दरगाह चौराहे के पास झांकियों को कुछ देर रोकना पड़ा। प्रशासन की ओर से यातायात और व्यवस्थाओं को नियंत्रित करने के प्रयास किए गए, लेकिन कारवां लगातार गति से आगे नहीं बढ़ सका।

रुक-रुककर आगे बढ़ने के कारण झांकियों की रफ्तार काफी धीमी रही। करीब एक घंटे में कारवां एक किलोमीटर से भी कम दूरी तय कर पाया और लगभग 7 बजे तक जेल रोड पोस्ट ऑफिस क्षेत्र तक ही पहुंच सका। करीब 7:30 बजे खजराना गणेश की झांकी चौराहे के पुल के पास पहुंची। इस दौरान भी कारवां धीमी गति से आगे बढ़ रहा था।

अखाड़ों के प्रदर्शन के लिए विशेष निर्णायक मंच

इस बार जिला प्रशासन ने अखाड़ों के प्रदर्शन के लिए कृष्णपुरा छत्री पर विशेष निर्णायक मंच तैयार किया है। शहर के पुराने और अनुभवी खलीफाओं को निर्णायक मंडल में शामिल किया गया है।

हर अखाड़े के प्रदर्शन के लिए तीन मिनट का समय निर्धारित किया गया है। टाइमर के जरिए समय की निगरानी की जा रही है। निर्णायक मंडल अखाड़ों के प्रदर्शन के आधार पर अंक देगा। इसी आधार पर जिला प्रशासन द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अखाड़ों को पुरस्कृत किया जाएगा।

प्रदर्शन में अनुशासन और समयबद्धता को भी अहम हिस्सा बनाया गया है। पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें अखाड़ों के साथ पूरे झांकी कारवां की व्यवस्थाओं पर नजर रख रही हैं।

बालिकाओं ने दिखाए हैरतअंगेज करतब

इस बार अखाड़ों के प्रदर्शन में महिलाओं और बालिकाओं की भागीदारी भी खास रही। पंचमुखी गुरु अखाड़े में छोटी-छोटी बालिकाओं ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। पारंपरिक शस्त्र कला और शारीरिक कौशल के प्रदर्शन ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

वहीं पवन पुत्र व्यायामशाला ने भी निर्णायक मंच के पास पहुंचकर करीब 7:30 बजे प्रस्तुति दी। कलाकारों ने शस्त्र कला, शारीरिक संतुलन और बेहतर तालमेल का प्रदर्शन किया।

रात बढ़ने के साथ बढ़ती गई भीड़

शुरुआती समय में प्रमुख चौराहों पर दर्शकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। शाम करीब 7:30 बजे फ्रूट मार्केट चौराहा भी काफी हद तक खाली नजर आया। हालांकि, रात बढ़ने के साथ झांकियों को देखने के लिए सड़कों पर लोगों की भीड़ बढ़ती गई।

रंग-बिरंगी रोशनी से सजी झांकियों और अखाड़ों की कलाबाजियों ने शहर में उत्सवी माहौल बना दिया। लोग परिवार के साथ सड़कों के किनारे खड़े होकर झांकियों और अखाड़ों के प्रदर्शन का आनंद लेते नजर आए।

रात 8 बजे निर्णायक मंच पर पहुंची पहली झांकी

करीब रात 8 बजे खजराना गणेश मंदिर की झांकी फ्रूट मार्केट क्षेत्र स्थित निर्णायक मंच तक पहुंची। यहां झांकी के साथ चल रहे अखाड़े ने निर्णायकों और दर्शकों के सामने अपनी प्रस्तुति दी।

प्रदर्शन में पारंपरिक शस्त्र कला, शारीरिक कौशल और तालमेल देखने को मिला। अखाड़ों के कलाकारों ने वर्षों से चली आ रही अपनी कला और परंपरा को विभिन्न करतबों के माध्यम से प्रस्तुत किया।

70 से ज्यादा अखाड़े दिखाएंगे अपना हुनर

इंदौर के झांकी कारवां में 70 से ज्यादा अखाड़ों के शामिल होने की बात सामने आई है। शहर के अलग-अलग अखाड़े झांकियों के साथ चलते हुए निर्धारित स्थानों पर अपने करतब प्रस्तुत कर रहे हैं।

धीमी रफ्तार के बावजूद झांकियों का कारवां प्रशासन की निगरानी में आगे बढ़ता रहा। रात बढ़ने के साथ सड़कों पर लोगों की भीड़ और उत्साह भी बढ़ता गया। रोशनी से सजी झांकियों और अखाड़ों के प्रदर्शन के बीच इंदौर की वर्षों पुरानी झांकी और अखाड़ा परंपरा एक बार फिर जीवंत नजर आई।

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