राज्यों से ड्रग्स तस्करी नेटवर्क को खत्म करने के लिए एनसीबी ने मांगा तीन साल का रोडमैप

नई दिल्ली,  नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने देश भर से नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए एक स्पष्ट और आक्रामक रणनीति पर जोर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए एनसीबी प्रमुख ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपील की कि वे राष्ट्रीय विजन दस्तावेज (2026-29) के अनुरूप अपना तीन साल का विशेष रोडमैप तैयार करें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए राज्यों को अपनी स्थानीय चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुसार लक्षित प्रयास करने होंगे।

सिर्फ जब्ती नहीं, बल्कि ड्रग्स तस्करी के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने पर रहेगा विशेष जोर

सम्मेलन के दौरान एनसीबी चीफ ने प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यप्रणाली में एक बड़े बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि एजेंसियों को अब केवल नशीली दवाओं की मात्रा जब्त करने तक सीमित न रहकर, तस्करी के पीछे सक्रिय अंतरराष्ट्रीय, अंतर-राज्यीय और स्थानीय नेटवर्कों की पहचान कर उन्हें पूरी तरह से खत्म करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस दो दिवसीय सम्मेलन में ‘यूनाइटेड रिज़ॉल्व, शेयर्ड रिस्पॉन्सिबिलिटी’ थीम के तहत सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठकों में डार्कनेट, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाले ड्रग अपराधों, वित्तीय प्रोफाइलिंग और पीआईटीएनडीपीएस (PITNDPS) अधिनियम के प्रभावी उपयोग जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाने का है बड़ा राष्ट्रीय लक्ष्य, रेलवे सुरक्षा बल के साथ भी हुआ समन्वय

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित 31 दिसंबर 2029 तक भारत को पूरी तरह से ड्रग्स मुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में यह सम्मेलन मील का पत्थर साबित होगा। सम्मेलन में शिक्षण संस्थानों के आसपास 500 मीटर के दायरे को ड्रग-फ्री जोन बनाने, यूजीसी के नशा मुक्त कैंपस फ्रेमवर्क और ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ को और अधिक तीव्र करने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा, रेलवे के माध्यम से होने वाली तस्करी रोकने के लिए एनसीबी और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के बीच क्षमता निर्माण, सूचना के आदान-प्रदान और संयुक्त अभियानों को संस्थागत रूप देने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी चर्चा की गई।

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