यूएनजीए-81 में भारत ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, हेपेटाइटिस उन्मूलन और सिकल सेल देखभाल पर अपनी बात रखी

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (वार्ता) भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र (यूएनजीए-81) के दौरान आयोजित वैश्विक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, हेपेटाइटिस उन्मूलन और सिकल सेल बीमारी से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में प्रमुखता से जानकारी दी है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज बताया कि स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और किफायती बनाने के लिए भारत के अनुभव साझा किए। यूएचसी पर आयोजित बैठक में श्रीमती श्रीवास्तव ने बताया कि देश में 1.8 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं लोगों के करीब पहुंचाई जा रही हैं।

उन्होंने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई), निशुल्क दवा एवं डायग्नोस्टिक्स सेवाओं तथा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर और वंचित वर्गों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि 90 करोड़ से अधिक लोगों के पास यूनिक हेल्थ आईडी है और ई-संजीवनी के माध्यम से 49.7 करोड़ से अधिक टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं।

हेपेटाइटिस को खत्म करने के लिए वैश्विक कार्रवाई से जुड़े कार्यक्रम में भारत ने 2030 तक हेपेटाइटिस बी और सी को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में खत्म करने के अपने लक्ष्य को दोहराया। राष्ट्रीय विषाणु हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 2018 से करीब 22.5 करोड़ लाभार्थियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और उपचार केंद्रों की संख्या बढ़कर 1,039 हो गई है। स्क्रीनिंग सेवाएं लगभग 1.80 लाख प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं से लेकर तृतीयक स्वास्थ्य संस्थानों तक उपलब्ध कराई जा रही हैं।

श्रीमती श्रीवास्तव ने 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में खत्म करने के लक्ष्य के तहत भारत के राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की प्रगति बताई। मिशन के तहत 7.29 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग, 20 लाख से अधिक कैरियर की पहचान और 2.5 लाख से अधिक मामलों का पता लगाया गया है, जबकि 4.93 करोड़ से अधिक सिकल सेल कार्ड वितरित किए गए हैं। उन्होंने समय पर जांच, उपचार, हाइड्रॉक्सीयूरिया थेरेपी, फॉलो-अप और डिजिटल ट्रैकिंग को मजबूत करने के साथ स्वदेशी जीन-एडिटिंग थेरेपी पर चल रहे शोध का भी उल्लेख किया।

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