सतना: जिले में करीब 20 दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश का असर अब दलहन और तिलहन फसलों पर दिखाई देने लगा है। कृषि विभाग के अनुसार भारी वर्षा से तिल की करीब 75 प्रतिशत फसल नष्ट हो चुकी है, जबकि लगातार हो रही बारिश से मूंग की फसल के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। वहीं, धान उत्पादक किसानों के लिए मौजूदा बारिश राहत लेकर आई है।
जिले में मौसम की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। भारी बारिश के कारण तिल और मूंग जैसी दलहन-तिलहन फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार, करीब 20 दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश से जिले में तिल की लगभग 75 प्रतिशत फसल नष्ट हो चुकी है। वर्तमान में करीब 25 प्रतिशत फसल ही बची है। किसानों के सामने अब बची हुई फसल को सुरक्षित रखने की चुनौती है। बताया जा रहा है कि यदि आगामी 10 से 15 दिनों में दोबारा भारी बारिश होती है, तो तिल की बची हुई फसल को भी नुकसान पहुंच सकता है।
मूंग की फसल पर भी संकट
रुक-रुककर हो रही बारिश से मूंग की फसल भी प्रभावित हो रही है। खेतों में पानी जमा होने और लगातार नमी बने रहने से फसल के सड़ने की आशंका बढ़ गई है। इससे किसानों को उत्पादन में कमी के साथ आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
धान के लिए बारिश बनी वरदान
जहां दलहन और तिलहन उत्पादक किसान बारिश से परेशान हैं, वहीं धान की खेती करने वाले किसानों के लिए मौजूदा मौसम राहत लेकर आया है। जिले के कृषि रकबे में करीब 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा धान का बताया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय हो रही बारिश धान की फसल के लिए फायदेमंद है और खेतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से फसल को लाभ मिल रहा है।
कृषि कल्याण विभाग के राम सिंह बागरी ने बताया कि भारी बारिश से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे राजस्व विभाग द्वारा कराया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही फसल क्षति की वास्तविक स्थिति और नुकसान का आकलन स्पष्ट हो सकेगा।
