इंदौर: स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत पर नजर कैसे रखी जाती है, बिलिंग कैसे होती है और बिजली चोरी की पहचान में यह तकनीक किस तरह मददगार है—इन्हीं पहलुओं को समझने के लिए सात राज्यों के बिजली अधिकारी शुक्रवार को इंदौर के स्मार्ट मीटर कंट्रोल सेंटर पहुंचे.
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन के सहयोग से आईआईएम इंदौर में चल रहे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण में शामिल अधिकारी मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कंट्रोल सेंटर पहुंचे. दल में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर और मध्यप्रदेश के अधिकारी शामिल थे. कंट्रोल सेंटर में स्मार्ट मीटर की अधीक्षण यंत्री कीर्ति सिंह और प्रभारी नवीन गुप्ता ने अधिकारियों को मीटर से मिलने वाले डेटा और उसकी निगरानी की प्रक्रिया बताई. अधिकारियों ने जाना कि मीटर से प्राप्त खपत के आंकड़ों के आधार पर रीडिंग और बिलिंग की जाती है. इससे मैनुअल रीडिंग पर निर्भरता घटती है और बिलिंग में होने वाली गड़बड़ियों को कम करने में मदद मिलती है. स्मार्ट मीटर से मिलने वाले डेटा के जरिए बिजली खपत के पैटर्न और असामान्य खपत की पहचान की जा सकती है. इससे बिजली चोरी या अन्य अनियमितताओं को पकड़ने में भी मदद मिल सकती है.
बिजली खपत नियंत्रित करने की दी जानकारी
अधिकारियों को टाइम ऑफ डे व्यवस्था, बिजली की खपत को अलग-अलग समय में नियंत्रित करने और बिल कम करने के संभावित तरीकों की जानकारी दी गई. इसके अलावा सौर ऊर्जा कनेक्शन में नेट मीटरिंग के लिए स्मार्ट मीटर के इस्तेमाल के बारे में भी बताया गया. अधिकारियों ने तकनीक और इसके व्यावहारिक इस्तेमाल से जुड़े सवाल पूछे, जिनके जवाब कंट्रोल सेंटर की टीम ने दिए.
