सीधी : खजुलैया त्यौहार के अवसर पर छात्र जीवन में जेल के साथी 47 साल बाद कल इंडियन कॉफी हाउस सीधी में मिले। आपस में सुख-दुख साझा किया, संस्मरण सुनाया। मुख्य अतिथि उस जमाने के छात्र नेता तथा पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ला रहे।उपस्थित साथियों में विजय सिंह, डॉ.गणपति मिश्रा, सिया शरण शर्मा, तुलसीदास मिश्रा, सोमेश्वर द्विवेदी, सुरेश तिवारी, नर्मदा तिवारी, अम्बरीष सिंह परिहार, सोमेश्वर सिंह, राजेंद्र शुक्ला, पीतांबर तिवारी तथा डॉ.रजनीश तिवारी प्रमुख रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी ने मुख्य अतिथि केदारनाथ शुक्ला का माल्यार्पण से स्वागत किया।
मुख्य अतिथि केदारनाथ शुक्ला ने कहा कि उस जमाने में हम सभी युवा थे, आज बुजुर्ग हो गए हैं। 50 साल पहले उस जमाने में भी आप सभी का छात्र आंदोलन एक तरह का जेन जी आंदोलन था। उन्होंने सलाह दिया कि इस मित्र मिलन कार्यक्रम को विस्तारित करके निरंतर खजुलैया के दिन प्रत्येक वर्ष रखा जाए ताकि प्रेम संबंध जन्म जन्मांतर बने रहे। वरिष्ठ लेखक तथा पत्रकार सोमेश्वर सिंह ने कहा-यह जीवन एक कुरुक्षेत्र है। सामाजिक जीवन में हम सभी महाभारत युद्ध की तरह एक पात्र हैं। कोई कृष्ण है-कोई सुदामा, कोई कर्ण है-कोई अर्जुन, तो कोई द्रोण है या भीष्म।
हम सभी को अपने-अपने हिस्से का युद्ध लडऩा पड़ता है किंतु इस युद्ध में एक अद्भुत साम्यता है। सभी योद्धा समर्पित हैं इंद्रप्रस्थ की तरह इस मातृभूमि के लिए। कॉलेज के भूतपूर्व छात्र संघ अध्यक्ष विजय सिंह ने अपने संस्मरण में कहा कि वक्त के साथ चेहरे भले पुराने पड़ जाएं किन्तु दिल के रिश्ते कभी पुराने नहीं होते। यह रिश्ते ऐसे हैं जिन्हें समझने समझाने में शब्द भी कम पड़ जाएंगे। बस इन्हें महसूस किया जा सकता है। छात्र राजनीति में केदार भैया नेतृत्व कर्ता थे। उन्हीं के अगुआई में आंदोलन होता था। छात्र संघ चुनाव में केदार भैया के पैनल का दबदबा रहता था।
पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष तथा शासकीय अधिवक्ता नर्मदा प्रसाद तिवारी ने कहा कि 1978-79 के चुनाव में विजय सिंह प्रेसिडेंट तथा मैं सेक्रेटरी का चुनाव जीता था। जुलूस निकला था, अग्रिम पंक्ति में सुरेश तिवारी भी चल रहे थे बस स्टैण्ड के पास कुछ लोगों ने भी विवाद कर दिया। जीत का जुनून था। फिर क्या-ए जुलूस विरोध स्वरूप कोतवाली पहुंच गया। आधी रात तक घेराव चला। गिरफ्तारी हुई पुलिस लाइन के परेड ग्राउंड को खुली जेल बनाया गया। पुलिस जानबूझकर गिरफ्तारी पंचनामा के बहाने टाइम पास करती रही। जिससे थक हार कर स्टूडेंट घर चले जाएं। सैकड़ो साथी गिरफ्तारी देने के लिए अडिग रहे। गिरफ्तारी हुई सुबह सेंट्रल जेल रीवा ले जाया गया। मित्र मिलन कार्यक्रम में जेल के दिवंगत सहयात्री साथियों के बहुमूल्य योगदान को याद करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कुंवर अर्जुन सिंह की यादें हुई ताजा
चर्चा के दौरान सुरेश तिवारी ने कहा कि लगभग तीन महीने जेल में रहे। उसी दरमियान म.प्र. के तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष स्वर्गीय अर्जुन सिंह को अन्य कांग्रेसियों के साथ गिरफ्तार कर जेल लाया गया था। एक ही बैरक नंबर पांच में थे। दीपावली जेल में ही बीती थी। बाहर से किसी शुभचिंतक ने कांग्रेसियों के लिए फल-फूल मिठाई भेजी थी। कुंवर साहब ने बैरक नंबर पांच में बंद सभी लोगों को मिठाइयां बंटवाई। बैरक नंबर पांच राजनीतिक बंदियों के लिए आरक्षित था। कुंवर साहब ने केदार भैया से पूछा- शुक्ला जी मिठाई खाई, केदार भैया ने कटाक्ष किया- कुंवर साहब जेल में मिठाई नहीं मिलती।
